छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिले के सकरी गांव में रहने वाले उमाशंकर साहू का शव जब तीन दिन बाद जंगल में मिला, तो पुलिसकर्मी शव को परिजनों के पास छोड़कर लौट गए। इसके बाद परिजन शव को बोरे में भरकर बाइक से पोस्टमार्टम के लिए मॉर्चुरी तक ले गए।
क्या है पूरा मामला
बिलासपुर के जूनापारा चौकी क्षेत्र के सकरी गांव में रहने वाले उमाशंकर साहू 15 मई को जंगल में लकड़ी बीनने गए थे, जिसके बाद वे लापता हो गए। परिजनों ने उनकी तलाश की और बाद में थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई। तीन दिन बाद जंगल में उमाशंकर का क्षत-विक्षत शव मिला।
पुलिस की लापरवाही
शव मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन उसे गांव में परिजनों के पास ही छोड़कर चली गई। पुलिसकर्मियों ने परिजनों से कहा कि वे खुद शव को पोस्टमार्टम के लिए लेकर चलें, पुलिस वहीं पहुंचेगी। किसी वाहन की व्यवस्था नहीं की गई। मजबूर परिजन शव को बोरे में भरकर बाइक से ही मॉर्चुरी लेकर पहुंचे।
वीडियो सामने आने के बाद जांच शुरू
इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे। मामला उजागर होते ही बिलासपुर एसपी रजनेश सिंह ने जांच के आदेश दे दिए हैं। एसडीओपी को इस पूरे मामले की जांच सौंपी गई है और पुलिसकर्मियों से जवाब मांगा गया है कि इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।
परिजनों की आशंका
परिजनों का कहना है कि उन्हें शक है कि उमाशंकर पर किसी जंगली जानवर ने हमला किया होगा। लेकिन वे पुलिस की संवेदनहीनता से आहत हैं। उनका कहना है कि संकट की इस घड़ी में मदद की बजाय पुलिस ने उन्हें और अधिक परेशान किया।
निष्कर्ष
यह घटना छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद दोषी अधिकारियों पर उचित कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।