भारत और स्पेन के बीच बढ़ता रक्षा व औद्योगिक सहयोग आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती दे रहा है। गुजरात के वडोदरा में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस की साझेदारी से स्थापित C-295 विमान की फाइनल असेंबली लाइन (FAL) अब ‘मेड इन इंडिया’ सैन्य परिवहन विमानों की डिलीवरी का मार्ग प्रशस्त कर रही है। यह परियोजना न केवल भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि देश में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी गति देगी।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस के साथ बैठक के दौरान आर्थिक साझेदारी को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की आवश्यकता पर जोर देते हुए भारत–स्पेन सहयोग को साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अहम बताया। साथ ही, भारत–यूरोपीय संघ संबंधों को मजबूत करने में स्पेन के समर्थन और ‘हिंद-प्रशांत महासागर पहल’ (IPOI) में भागीदारी का स्वागत किया।
C-295 सौदे के तहत भारतीय वायुसेना को कुल 56 विमान मिल रहे हैं, जिनमें 40 विमान भारत में निर्मित किए जाएंगे। यह परियोजना 21,935 करोड़ रुपये के अनुबंध का हिस्सा है। वडोदरा संयंत्र में अंतिम असेंबली, परीक्षण और डिलीवरी की व्यवस्था भारत में उच्च स्तरीय एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमता विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
भारत और स्पेन के राजनयिक संबंध 1956 में स्थापित हुए थे। समय के साथ यह रिश्ता सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक आयामों में विस्तृत हुआ है। स्पेन, जो 1982 से नाटो का सदस्य है, भारत के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग को नए स्तर पर ले जा रहा है। वहीं भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के साथ बहुपक्षीय सहयोग को संतुलित तरीके से आगे बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, C-295 परियोजना से देश में एमएसएमई और सप्लाई चेन को भी बड़ा लाभ होगा, क्योंकि अनेक पुर्जों और उप-प्रणालियों का निर्माण देश में ही किया जाएगा। इससे रोजगार सृजन, तकनीकी हस्तांतरण और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यह पहल भारत की रक्षा विनिर्माण आत्मनिर्भरता, यूरोपीय साझेदारी और रणनीतिक सहयोग—तीनों को एक साथ मजबूत करती है, जो भविष्य की रक्षा जरूरतों के साथ-साथ औद्योगिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।
