नई दिल्ली। भारत अपनी सामरिक रक्षा क्षमता को और मजबूत करने के लिए नई पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) तकनीक पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नई मिसाइल मौजूदा अग्नि-5 मिसाइल से अधिक उन्नत हो सकती है और लंबी दूरी तक लक्ष्य भेदने की क्षमता रखेगी।
जानकारी के मुताबिक, जहां अग्नि-5 मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 5,000 से 5,500 किलोमीटर तक है, वहीं प्रस्तावित नई मिसाइल की रेंज 10,000 किलोमीटर से अधिक हो सकती है। इसके साथ ही इसमें एक साथ कई वॉरहेड ले जाने की क्षमता विकसित किए जाने की भी चर्चा है, जिससे एक ही प्रक्षेपण में अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकेगा।
आधुनिक तकनीक से लैस होगी मिसाइल
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस नई मिसाइल में मैन्यूवेरेबल री-एंट्री व्हीकल (MARV) तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तकनीक की मदद से मिसाइल वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते समय अपना रास्ता बदल सकती है, जिससे दुश्मन के रडार और मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका के THAAD, रूस के S-500 और चीन के HQ-9 जैसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम मुख्य रूप से सीधी दिशा में आने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए तैयार किए गए हैं। ऐसे में दिशा बदलने वाली मिसाइल तकनीक रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।
हल्के और मजबूत निर्माण पर जोर
नई मिसाइल को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसके निर्माण में एडवांस कंपोजिट मटेरियल के उपयोग पर भी काम किया जा रहा है। स्टील के बजाय हल्के लेकिन मजबूत पदार्थों के इस्तेमाल से मिसाइल का वजन कम होगा, ईंधन की बचत होगी और मारक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भारत की रणनीतिक ताकत को मिलेगा बढ़ावा
यदि यह परियोजना सफल होती है तो भारत को लंबी दूरी से सटीक हमला करने, एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने और दुश्मन की एंटी-मिसाइल डिफेंस प्रणाली को चकमा देने जैसी महत्वपूर्ण क्षमताएं मिल सकती हैं। रक्षा क्षेत्र में यह विकास भारत की सामरिक शक्ति को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करेगा।
हालांकि, इस मिसाइल परियोजना को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
