भारतीय दोपहिया वाहन उद्योग के लिए साल 2025 बेहद सफल साबित हुआ है। कई वर्षों के उतार-चढ़ाव के बाद भारतीय टू-वीलर मार्केट ने 2 करोड़ यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही निर्यात में 24.2 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई, जिसने भारतीय कंपनियों की वैश्विक ताकत को एक बार फिर साबित कर दिया है।
हालांकि कुल बिक्री अभी भी वर्ष 2018 के रिकॉर्ड स्तर (2.1 करोड़ यूनिट्स) से थोड़ी कम है, लेकिन लगातार बढ़ती मांग ने 2026 को लेकर उद्योग में सकारात्मक उम्मीदें जगा दी हैं।
निर्यात में बना नया रिकॉर्ड
साल 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धि भारतीय दोपहिया वाहनों के निर्यात में देखने को मिली। भारत ने रिकॉर्ड 49.4 लाख मोटरसाइकिल और स्कूटर विदेशों में निर्यात किए।
अफ्रीकी देशों और दक्षिण एशिया में भारतीय बाइक्स और स्कूटरों की बढ़ती मांग इसके पीछे सबसे बड़ा कारण रही। किफायती कीमत, बेहतर माइलेज और मजबूत तकनीक ने भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिलाई।
कौन सी कंपनी रही आगे
- हीरो मोटोकॉर्प :
57.5 लाख यूनिट्स की बिक्री के साथ हीरो मोटोकॉर्प देश की सबसे बड़ी टू-वीलर कंपनी बनी रही। हालांकि कंपनी की ग्रोथ दर 2 प्रतिशत रही, जो अन्य कंपनियों की तुलना में धीमी मानी जा रही है। - टीवीएस मोटर :
टीवीएस मोटर ने सबसे तेज रफ्तार दिखाई। कंपनी की बिक्री 15.7 प्रतिशत बढ़कर 39.8 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई, जिससे वह ग्रोथ के मामले में सबसे आगे रही।
शहरों में स्कूटरों की बढ़ती मांग
साल 2025 में ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी क्षेत्रों ने बिक्री को ज्यादा रफ्तार दी।
शहरों में लोगों ने मोटरसाइकिल की तुलना में स्कूटरों को ज्यादा प्राथमिकता दी। आसान फाइनेंस और लोन सुविधा ने भी दोपहिया खरीद को और सरल बना दिया।
सरकारी नीतियों का असर
दोपहिया बिक्री में बढ़ोतरी के पीछे सरकारी फैसलों की भी अहम भूमिका रही।
जीएसटी में की गई कटौती के कारण टू-वीलर्स की कीमतों में कमी आई, जिससे ग्राहकों की खरीदारी में रुचि बढ़ी। टैक्स में राहत का सीधा फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचा।
2026 को लेकर उम्मीदें
ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में टू-वीलर मार्केट और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।
इस साल हर सेगमेंट में कई नई मोटरसाइकिल और स्कूटर लॉन्च होने की उम्मीद है। युवाओं के बीच एडवेंचर बाइक्स का क्रेज लगातार बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए कंपनियां नए और आधुनिक मॉडल पेश करेंगी।
अब भारतीय कंपनियां ऐसे वाहन विकसित कर रही हैं, जो घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक मानकों पर भी पूरी तरह खरे उतर सकें।
