भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के तीखे बयान ने पाकिस्तान की सेना और सरकार की बेचैनी बढ़ा दी है। हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में बोलते हुए जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि “भारत की अधिकांश समस्याओं की जड़ पाकिस्तान की सेना है।”
उन्होंने कहा कि आतंकवादी ढांचा, प्रशिक्षण शिविर और भारत–विरोधी वैचारिक अभियान — इन सभी का मूल स्रोत पाकिस्तान की सेना है। जयशंकर ने यह भी दोहराया कि भारत को किसी “हाइफ़नेशन मानसिकता” में नहीं रहना चाहिए और कोई भी देश भारत की विदेश नीति पर वीटो लगाने की उम्मीद न करे।
पाकिस्तान का तंज — “भड़काऊ और बेबुनियाद बयान”
जयशंकर की टिप्पणी पर पाकिस्तान सरकार तुरंत रक्षात्मक मुद्रा में आ गई। इस्लामाबाद ने उनके बयानों को “भड़काऊ, बेबुनियाद और दुष्प्रचार का हिस्सा” बताया।
पाक विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी सेना “राष्ट्रीय सुरक्षा का स्तंभ” है और किसी भी आक्रमण का “जिम्मेदारी से सामना कर सकती है।”
विशेष रूप से, पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को लेकर जयशंकर की टिप्पणी पर पाकिस्तान ने तीखी आपत्ति जताई।
भारत–पाक संबंधों की जमीनी हकीकत
दरअसल, जयशंकर ने वह कहा जिसे दुनिया दशकों से जानती है —
पाकिस्तान में असली सत्ता चुनी हुई सरकार के पास नहीं, बल्कि रावलपिंडी स्थित GHQ के पास है।
कई वैश्विक विश्लेषक यह मानते हैं कि पाकिस्तान की सेना ही आतंकवाद को विदेश नीति का औजार बनाती है, भारत–विरोध को राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बनाती है और देश की खराब अर्थव्यवस्था के बावजूद भारी बजट खाती है।
पाकिस्तान की मजबूरी और झुँझलाहट क्यों?
जयशंकर की बात पाकिस्तान की उस “दर्दनाक नस” पर चोट करती है जिसकी वजह से उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार आलोचना झेलनी पड़ती है:
- आतंकवादी संगठनों से ऐतिहासिक संबंध
- FATF की कड़ी निगरानी
- आर्थिक संकट
- राजनीतिक अस्थिरता
- सेना की ढहती वैश्विक साख
भारत की इस स्पष्टवादिता का असर IMF वार्ताओं से लेकर वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के नजरिये तक दिखाई दे सकता है।
भारत का संकेत — आतंक की जड़ों पर सीधी कार्रवाई
जब भारत का शीर्ष राजनयिक पाकिस्तान की सेना को समस्या की जड़ बताता है, तो यह सीधा संकेत है कि भविष्य में किसी भी आतंकवादी हमले की स्थिति में भारत की प्रतिक्रिया अधिक सीधी, आक्रामक और सैन्य-संरचना केंद्रित हो सकती है।
