अब जिला स्तर पर बिखेरेंगी बस्तरिया जायके की खुशबू
जगदलपुर, बस्तर की माटी की सोंधी खुशबू और उसकी समृद्ध लोक-संस्कृति एक बार फिर गर्व का विषय बनी है। धाराउर में आयोजित लोहंडीगुड़ा विकासखंड स्तरीय बस्तर पण्डुम में बड़ांजी की महिलाओं ने अपनी अद्वितीय पाककला से न केवल दर्शकों का मन मोह लिया, बल्कि प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया।
इस आयोजन में बड़ांजी की महिला दल ने बस्तर की पारंपरिक भोजन परंपरा की समृद्धि को एक ही मंच पर जीवंत कर दिया। उन्होंने 36 प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों की भव्य प्रदर्शनी लगाई, जिसमें स्वाद और सेहत का अनोखा संगम देखने को मिला। उनकी थाली में बस्तर की पहचान माने जाने वाले मंडिया पेज और कोदो भात के साथ-साथ स्वाद बढ़ाने वाली प्रसिद्ध चापड़ा चटनी, केउ कंद से बनी केउ चटनी, पारंपरिक आमट तथा पौष्टिक मुनगा भाजी जैसे व्यंजनों ने खास आकर्षण पैदा किया।
इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे बड़ांजी की मातृशक्ति का समर्पण, परिश्रम और अपनी जड़ों से गहरा जुड़ाव रहा। टीम में शामिल कोयली मंडन, कमली बघेल, सुकरी मंडावी, चंपा कश्यप, निरबती और चंद्रकांती ने मिलकर इन सभी 36 व्यंजनों को तैयार किया। इन महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी बस्तर की पारंपरिक रसोई और खान-पान की विरासत पूरी तरह जीवित है।
विकासखंड स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद अब इस विजेता टीम का आत्मविश्वास और उत्साह दोनों बढ़ गए हैं। बड़ांजी की ये महिलाएं अब जगदलपुर में आयोजित जिला स्तरीय बस्तर पण्डुम में अपने स्वाद और संस्कृति का जादू बिखेरेंगी। उम्मीद है कि जिस तरह धाराउर में उनके व्यंजनों ने सबका दिल जीता, उसी तरह जिला स्तर पर भी बस्तरिया जायके और परंपरा की खुशबू दूर-दूर तक फैलेगी।
