भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि भारत को अपने लोगों की सुरक्षा के लिए किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई पड़ोसी देश भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देता रहेगा, तो वह भारत से पानी साझा करने जैसी अपेक्षाएँ नहीं कर सकता।
शुक्रवार 2 जनवरी 2026 को चेन्नई में आईआईटी मद्रास के छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री ने भारत की नेबरहुड पॉलिसी पर खुलकर बात की। उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा,
“आपके पड़ोसी अच्छे भी हो सकते हैं और बुरे भी। दुर्भाग्य से हमारे कुछ पड़ोसी बुरे हैं।”
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-पाकिस्तान के संबंध 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद और अधिक तनावपूर्ण हो गए थे। उस हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत हुई थी और भारत ने इसे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद बताया था।
विदेश मंत्री ने कहा कि जब बात बुरे पड़ोसियों की आती है, तो भारत को अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने दो टूक कहा कि
“अगर कोई देश भारत में आतंकवाद जारी रखता है, तो वह नई दिल्ली से पानी साझा करने की मांग नहीं कर सकता।”
सिंधु जल संधि पर भी दिया स्पष्ट संदेश
सिंधु जल संधि के संदर्भ में जयशंकर ने कहा कि लगातार दुश्मनी के साथ सद्भावना नहीं निभाई जा सकती। उन्होंने कहा कि दशकों पहले जल बंटवारे पर सहमति बनी थी, लेकिन अगर वर्षों तक आतंकवाद चलता रहेगा तो अच्छे पड़ोसी संबंध संभव नहीं हैं।
“आप यह नहीं कह सकते कि आप आतंकवाद जारी रखें और साथ ही पानी साझा करने की अपेक्षा करें। यह सुलह संभव नहीं है।”
अच्छे पड़ोसियों के लिए भारत हमेशा उदार
जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अच्छे पड़ोसियों के साथ सहयोग में कभी पीछे नहीं रहा। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान ईंधन और खाद्य सहायता, तथा श्रीलंका को दिए गए 4 अरब अमेरिकी डॉलर के वित्तीय पैकेज का उदाहरण दिया।
छात्रों से संवाद में उन्होंने भारतीय सभ्यता, लोकतंत्र और सांस्कृतिक आत्मविश्वास पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत को अपने इतिहास, परंपरा और लोकतांत्रिक मॉडल पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि भारत का लोकतंत्र विश्व के लिए एक सार्वभौमिक राजनीतिक अवधारणा बन चुका है।
स्पष्ट संकेत
जयशंकर के इस बयान को पाकिस्तान के प्रति भारत की सख्त और स्पष्ट विदेश नीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें संदेश साफ है—
आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते।
