पश्चिम एशिया में जारी United States और Iran के बीच टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। यह संघर्ष धीरे-धीरे व्यापक अंतरराष्ट्रीय शक्ति संघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है। हाल में सामने आई खुफिया रिपोर्टों के अनुसार कई बड़े देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
चीन की संभावित आर्थिक और सैन्य मदद
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि China ईरान को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ मिसाइल से जुड़े पुर्जे और अन्य सैन्य सामग्री उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है। यह जानकारी उन सूत्रों के हवाले से सामने आई है जो इस मामले से परिचित बताए जा रहे हैं।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन इस संघर्ष में खुलकर शामिल होने से फिलहाल बच रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार चीन की सावधानी का कारण उसकी ऊर्जा आपूर्ति है, क्योंकि पश्चिम एशिया में अस्थिरता उसके तेल और गैस आयात को प्रभावित कर सकती है।
रूस की खुफिया जानकारी से मदद का दावा
इसी बीच यह भी सामने आया है कि Russia कथित तौर पर ईरान को पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, युद्धपोतों और विमानों की वास्तविक समय की जानकारी दे रहा है। ऐसी खुफिया जानकारी ईरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित हमलों की रणनीति बनाने में मदद कर सकती है।
हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में रूस और चीन कोई बड़ा कारक नहीं हैं। इसके बावजूद इन खुफिया रिपोर्टों ने Washington, D.C. में चिंता बढ़ा दी है।
रूस और चीन की रणनीतिक साझेदारी
विश्लेषकों का मानना है कि रूस और चीन दोनों ही देश अमेरिका के वैश्विक प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति के तहत ईरान के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहे हैं। चीन लंबे समय से ईरान का प्रमुख व्यापारिक साझेदार रहा है और ऊर्जा, बुनियादी ढांचे तथा निवेश के क्षेत्र में तेहरान को आर्थिक सहयोग देता रहा है।
दूसरी ओर रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग भी नया नहीं है। Syrian Civil War के दौरान दोनों देशों ने मिलकर सीरिया की सरकार का समर्थन किया था और खुफिया साझेदारी भी की थी।
उत्तर कोरिया और अन्य देशों की संभावित भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार North Korea भी लंबे समय से ईरान का रणनीतिक सहयोगी रहा है। Iran–Iraq War के दौरान उत्तर कोरिया ने ईरान को हथियार और मिसाइल तकनीक उपलब्ध कराई थी। इसके अलावा Venezuela सहित कुछ अन्य देशों को भी राजनीतिक रूप से ईरान के समर्थन में देखा जाता है।
वहीं Pakistan, Brazil, South Africa, Turkey और Oman जैसे कई देशों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए कूटनीतिक समाधान की मांग की है।
युद्ध का दायरा बढ़ने की आशंका
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में 50 हजार से अधिक सैनिक, 200 से ज्यादा लड़ाकू विमान और दो विमानवाहक पोत शामिल हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह संघर्ष कितने समय तक चलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस, चीन या उत्तर कोरिया जैसे देश किसी भी रूप में खुलकर ईरान के साथ खड़े हो जाते हैं, तो यह टकराव और व्यापक हो सकता है। इससे न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संघर्ष कूटनीति के जरिए सुलझता है या फिर वैश्विक शक्ति संतुलन को चुनौती देने वाले लंबे भू-राजनीतिक संघर्ष में बदल जाता है।
