ग्रामीण भारत को रोजगार व आजीविका की नई वैधानिक गारंटी
ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने तथा ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय विजन को साकार करने की दिशा में भारत सरकार द्वारा एक ऐतिहासिक पहल करते हुए ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) — व्हीबी जी राम जी अधिनियम, 2025’ लागू किया गया है। इस अधिनियम के प्रावधानों से ग्रामीणों को अवगत कराने के लिए प्रदेशभर में विशेष ग्राम सभाओं के आयोजन के निर्देश जारी किए गए हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला एवं जनपद स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं एवं ग्राम सभा में चर्चा के बिंदु हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
ग्राम सभाओं में होगी व्यापक सहभागिता
विशेष ग्राम सभाओं के आयोजन के दौरान ग्राम पंचायतों में गणमान्य नागरिकों को आमंत्रित किया जाएगा तथा तिथि व समय का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा। ग्रामीणों, श्रमिकों, महिलाओं, अनुसूचित जाति–जनजाति परिवारों एवं अन्य कमजोर वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। ग्राम सभाओं में व्हीबी जी राम जी अधिनियम के प्रावधानों, बढ़ी हुई रोजगार गारंटी तथा विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण पर विस्तार से जानकारी एवं मार्गदर्शन दिया जाएगा। अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं की मुद्रित प्रतियां भी वितरित की जाएंगी।
24 एवं 26 दिसंबर को होगा विशेष आयोजन
निर्देशों के अनुसार, अनुसूचित क्षेत्रों में राष्ट्रीय पेसा दिवस के अवसर पर 24 दिसंबर 2025 को विशेष ग्राम सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें व्हीबी जी राम जी अधिनियम को एजेंडा में शामिल किया जाएगा। वहीं, अनुसूचित क्षेत्रों को छोड़कर शेष ग्राम पंचायतों में 26 दिसंबर 2025 को ‘विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ के प्रति जनजागरूकता हेतु विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा।
पंचायत निर्णय ऐप पर अपलोड होगी संपूर्ण कार्यवाही
विशेष ग्राम सभाओं की संपूर्ण कार्यवाही, फोटो एवं वीडियो को वास्तविक समय में ‘पंचायत निर्णय’ मोबाइल ऐप में अपलोड किया जाएगा। साथ ही वाइब्रेंट ग्राम सभा पोर्टल एवं जीपीडीपी पोर्टल में शत-प्रतिशत प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी
व्हीबी जी राम जी अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक इच्छुक ग्रामीण परिवार को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी-रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। मांग के बावजूद समय पर कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देना राज्य सरकार की बाध्यता होगी। वहीं मजदूरी भुगतान में विलंब होने पर प्रत्येक विलंबित दिन का मुआवजा भी प्रदान किया जाएगा।
अधिनियम के तहत कार्य योजनाएं ग्राम सभा के माध्यम से तैयार की जाएंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया एवं पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन एवं जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रशासनिक मद की सीमा बढ़ाकर 9 प्रतिशत
सरकार द्वारा प्रशासनिक मद की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे फील्ड स्तर के कर्मचारियों की सेवाएं और सुदृढ़ होंगी। राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा के अंतर्गत संचालित कार्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और नए अधिनियम के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर और अधिक बढ़ेंगे।
राज्य शासन के अनुसार, यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार, आजीविका, पारदर्शिता और पंचायत सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाया जा सकेगा।
