संचार साथी ऐप को सभी नए मोबाइल फोनों में प्री-इंस्टॉल करने के सरकारी आदेश पर राष्ट्रीय स्तर पर विवाद तेज हो गया है। विपक्ष ने इस कदम को निजता का उल्लंघन, निगरानी तंत्र और “बिग ब्रदर” मॉडल बताया है, जबकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐप पूरी तरह वैकल्पिक है और उपयोगकर्ता चाहें तो इसे हटाने के लिए स्वतंत्र हैं।
दूरसंचार विभाग के 28 नवंबर के आदेश में कहा गया था कि नए स्मार्टफोनों में संचार साथी ऐप पहले से मौजूद होना चाहिए और जिन डिवाइसों में ऐप उपलब्ध नहीं है, उनमें इसे सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से दिया जाए। सरकार का तर्क है कि यह कदम साइबर धोखाधड़ी रोकने और उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। आदेश का सीधा प्रभाव एप्पल, सैमसंग, गूगल, शाओमी और वीवो जैसे प्रमुख स्मार्टफोन कंपनियों पर पड़ रहा है।
विपक्ष ने आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रियंका गांधी वाड्रा ने ऐप को “स्नूपिंग टूल” बताया, जबकि कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने इसे “बिग ब्रदर मॉडल” कहकर नागरिकों की निजता पर हमला करार दिया। कई नेताओं ने इसे निगरानी राज्य की ओर बढ़ता कदम बताया।
सरकार ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि ऐप अनिवार्य नहीं है और उपभोक्ता अपनी इच्छा से इसे सक्रिय या डिलीट कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि संचार साथी ऐप ने 2024 में करीब 22,800 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी रोकने में मदद की है। ऐप से IMEI सत्यापन, चोरी हुए फोन की शिकायत और उपयोगकर्ता के नाम पर दर्ज मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी मिलती है। अब तक 1.5 करोड़ से अधिक लोग इस ऐप को डाउनलोड कर चुके हैं और इसके जरिए 20 लाख से ज्यादा चोरी के डिवाइस ट्रैक किए जा चुके हैं, जिनमें से 7.5 लाख फोन उपभोक्ताओं को वापस सौंपे गए हैं।
बीजेपी ने भी विपक्ष के आरोपों को गलत बताया। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि ऐप किसी भी प्रकार का कॉल, संदेश या निजी डेटा एक्सेस नहीं करता और इसका उद्देश्य केवल सुरक्षा बढ़ाना है।
विवाद के बीच तकनीकी कंपनियां भी असमंजस में हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल सरकार को सूचित करने की तैयारी में है कि उसकी सिस्टम संरचना किसी भी सरकारी ऐप के अनिवार्य प्री-लोडिंग की अनुमति नहीं देती। वहीं, सैमसंग और गूगल आदेश की कानूनी और तकनीकी शर्तों का आकलन कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, इस मुद्दे पर सरकार, विपक्ष और टेक कंपनियों के बीच तकरार आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
