Digital Arrest Scam: नई दिल्ली। डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने व्हाट्सएप पर कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय की हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी ने व्हाट्सएप को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम में इस्तेमाल होने वाली डिवाइस आईडी को ब्लॉक करने का मैकेनिज्म बनाया जाए। कंपनी ने इन सुझावों पर सहमति जताई है और कुछ फीचर्स पर काम शुरू कर दिया है।
Digital Arrest Scam: कमेटी ने दिए प्रमुख निर्देश
कमेटी की तीसरी बैठक में विस्तार से चर्चा के बाद व्हाट्सएप को ये मुख्य फीचर्स लागू करने के निर्देश दिए गए हैं:
- डिजिटल अरेस्ट स्कैम में इस्तेमाल होने वाली डिवाइस आईडी को पहचानकर ब्लॉक करना।
- स्काइप जैसी कई सुरक्षा (प्रोटेक्टिव) सुविधाएं लागू करना।
- डिलीट हुए अकाउंट्स के यूजर डेटा को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखना।
- खतरनाक एपीके फाइलों को पहचानकर तुरंत ब्लॉक करने की व्यवस्था।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को मजबूत करके फर्जी कंटेंट और स्कैम मैसेज की पहचान करना।
व्हाट्सएप को इन नए फीचर्स के लिए 30 दिनों के भीतर प्रस्ताव पेश करने को कहा गया है। डिवाइस आईडी ब्लॉकिंग मैकेनिज्म के लिए अलग से 45 दिनों के भीतर प्रस्ताव मांगा गया है।
Digital Arrest Scam: डिजिटल अरेस्ट स्कैम का बढ़ता खतरा
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को फर्जी पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को डराते हैं और बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे मामलों में तेजी आई है, जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
Digital Arrest Scam: एक्टिव सिम से अकाउंट लिंक करने का नियम
पिछले साल 28 नवंबर को दूरसंचार विभाग (DoT) ने व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल और स्नैपचैट जैसे ऐप्स को यूजर्स के अकाउंट को एक एक्टिव सिम से जोड़ने का निर्देश दिया था। बताया जा रहा है कि व्हाट्सएप इस नियम को 4 से 6 महीनों के भीतर लागू कर सकता है।
