Mahashivratri 2026 : नई दिल्ली। हिन्दू धर्म का महापर्व महाशिवरात्रि 2026 में 16 फरवरी को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस साल महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन की पूजा का पुण्य और भी अधिक माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस योग में किए गए व्रत और पूजा से मानसिक शांति, आर्थिक बाधाओं से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
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Mahashivratri 2026 : महाशिवरात्रि 2026 के चार प्रहर पूजा का समय
- प्रथम प्रहर: 16 फरवरी 2026, शाम 06:01 बजे से रात्रि 09:09 बजे तक
- द्वितीय प्रहर: 16 फरवरी 2026, रात्रि 09:09 बजे से मध्यरात्रि 00:17 बजे तक
- तृतीय प्रहर: 16 फरवरी 2026, मध्यरात्रि 00:17 बजे से 03:25 बजे तक
- चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी 2026, सुबह 03:25 बजे से 06:33 बजे तक

Mahashivratri 2026 : महाशिवरात्रि पूजा विधि
- सूर्योदय से पहले उठकर गंगाजल से स्नान करें।
- सफेद या पीले वस्त्र पहनें और हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर पहले जल चढ़ाएं, फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर अर्पित करें।
- अंत में शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं।
- तीन पत्तों वाला बेलपत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए चढ़ाएं।
- धतूरे का फल, फूल और भांग अर्पित करें।
- सफेद चंदन से तिलक करें और बिना टूटे हुए चावल अर्पित करें।
- आक, कनेर या सफेद फूल चढ़ाएं और गाय के घी का दीपक जलाएं।
- ऋतु फल और सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
- पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें।
- अंत में कपूर और दीपक से आरती करें।
इस महापर्व पर की गई पूजा, व्रत और साधना से जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होती है। इस बार के शुभ योग और प्रदोष के संयोग के कारण महाशिवरात्रि 2026 विशेष महत्व रखती है।
