पुष्कर, राजस्थान : अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा पुष्कर शहर अपने धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए विश्वभर में जाना जाता है। यहां स्थित भगवान ब्रह्मा का मंदिर, जो पूरी दुनिया में अपनी विशिष्टता के कारण प्रसिद्ध है, सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी को समर्पित एकमात्र मंदिर है। यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी प्राचीनता, अनूठी स्थापत्य कला और पौराणिक कथाओं के कारण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ब्रह्मा मंदिर: सृष्टि के रचयिता का एकमात्र धाम
पुष्कर में स्थित ब्रह्मा मंदिर का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व अपार है। यह मंदिर दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां भगवान ब्रह्मा की विधिवत पूजा होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्माजी ने यहीं एक यज्ञ किया था, जिसने इस स्थल को खास बनाकर श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र कर दिया। मंदिर के लाल शिखर और संगमरमर की सुंदर वास्तुकला इसे एक भव्य धार्मिक स्थल बनाती है। मंदिर के गर्भगृह में चतुर्मुखी ब्रह्माजी की मूर्ति स्थापित है, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी हैं, जो इस धार्मिक स्थल की पवित्रता और आध्यात्मिकता को और बढ़ाते हैं।

ब्रह्मा मंदिर की पौराणिक कथा और महत्व
ऐतिहासिक दृष्टि से यह मंदिर 14वीं सदी में आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था। कहा जाता है कि ब्रह्माजी ने पुष्कर सरोवर के किनारे यज्ञ किया था, जहां देवी सरस्वती की अनुपस्थिति के कारण उन्होंने दूसरी स्त्री ‘गायत्री’ से विवाह किया। इस बात से नाराज होकर देवी सरस्वती ने श्राप दिया कि ब्रह्मा जी की पूजा पृथ्वी पर केवल पुष्कर में ही होगी। इसी कारण से यह स्थल ब्रह्मा जी की एकमात्र पूजा स्थली बन गया। पुष्कर झील में स्नान करने और ब्रह्माजी के दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, यही वजह है कि कार्तिक पूर्णिमा पर यहां विशेष पूजा और उत्सव आयोजित किए जाते हैं।

पुष्कर कुंभ मेला: धार्मिकता और सांस्कृतिक धरोहर का संगम
पुष्कर केवल ब्रह्मा मंदिर के लिए ही नहीं बल्कि अपने विश्वप्रसिद्ध पुष्कर कुंभ मेले के लिए भी जाना जाता है। यह मेला कार्तिक मास में आयोजित होता है, जिसमें हजारों की संख्या में ऊंट, घोड़े और अन्य पशुओं का व्यापार होता है। मेले में राजस्थानी लोक संगीत, नृत्य और पारंपरिक कला की झलक देखने को मिलती है। पुष्कर कुंभ मेला धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत संगम है, जिसकी तुलना बड़े कुंभ मेलों से की जाती है। इस दौरान पुष्कर झील के किनारे लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान कर आस्था की अनुभूति करते हैं।
