रायपुर। छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख समाजों ने एकजुट होकर अमित बघेल के खिलाफ दर्ज FIR का विरोध किया है। समाज के नेताओं का कहना है कि अमित बघेल के बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया और FIR दुर्भावनापूर्ण एवं अनुचित है।
इस संदर्भ में 6 और 7 नवंबर को सुंदर नगर, रायपुर में सर्व छत्तीसगढ़िया समाज के आह्वान पर विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी समाज, यादव समाज, आदिवासी समाज, निषाद समाज, सेन समाज, गोड़ समाज, सतनामी समाज, लोहार समाज, साहू समाज, गाड़ा समाज, चंदेल समाज, सोनकर समाज, चन्नाहू कुर्मी समाज और हलधर समाज सहित अनेक प्रमुख समाजों ने भाग लिया।
बैठक में निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए गए:
- FIR का विरोध: अमित बघेल के खिलाफ दर्ज दुर्भावनापूर्ण FIR के खिलाफ सर्व छत्तीसगढ़िया समाज ने निंदा प्रस्ताव पारित किया।
- FIR निरस्तीकरण: सभी प्रमुख समाजों ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से मिलकर इस FIR को निरस्त करवाने का संकल्प लिया।
- व्यापार नीति: आगामी समय में सभी लेन-देन केवल छत्तीसगढ़िया व्यापारियों से करने का निर्णय लिया गया।
- भाषा संकल्प: समाज के सभी कार्य राजभाषा छत्तीसगढ़ी में करने का संकल्प लिया गया।
- पुरखों का सम्मान: छत्तीसगढ़िया पुरखों के सम्मान को अक्षुण बनाए रखने और उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान जागरूक करने हेतु महारैली निकाली जाएगी। समाज ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ के पुरखों और महापुरुषों के अपमान करने वालों के खिलाफ सरकार ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी की मूर्ति, वीर नारायण सिंह की प्रतिमा, संत गुरु घासीदास के चित्र और डॉ. खुबचंद बघेल की मूर्ति पर किए गए अपमानजनक कृत्यों के अपराधियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सर्व छत्तीसगढ़िया समाज ने सरकार से मांग की है कि ऐसे मामलों में राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए और प्रदेश में शांति एवं शासकीय निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। समाज ने शासन से अपील की है कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर छत्तीसगढ़ियावाद को बढ़ावा दिया जाए और एकपक्षीय कार्यवाही पर रोक लगाई जाए।
