रायपुर। नगर निगम की एमआईसी बैठक में बुधवार को भाटागांव का नाम बदलने का प्रस्ताव एजेंडा में शामिल किया गया, लेकिन इस पर जमकर सियासी घमासान देखने को मिला। बैठक में महापौर एजाज ढेबर ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कड़े शब्दों में नाराजगी जताई।
महापौर का तीखा बयान
महापौर एजाज ढेबर ने नाम बदलने के इस प्रस्ताव को पूरी तरह से अनावश्यक बताते हुए कहा,
“यह प्रस्ताव किसी भी प्रकार से पास करने लायक नहीं है। क्यों किसी इलाके का नाम बदलेंगे? ब्राह्मणपारा या बैजनाथपारा का नाम भी ऐसे ही बदल देंगे? यह बिल्कुल अनुचित है।”
उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव पुरंदर मिश्रा द्वारा लाया गया था, जो पूरी तरह से आधारहीन है। ढेबर ने सवाल उठाया कि विधायकों को अपने क्षेत्र का सही ज्ञान नहीं है और वे अनावश्यक रूप से उत्तर और दक्षिण क्षेत्र के नाम बदलने में लगे हैं। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा,
“ऐसा लगता है कि सरकार भगवान भरोसे चल रही है।”
प्रस्ताव गिराने का निर्णय
महापौर ने स्पष्ट किया कि इस एजेंडे को एमआईसी बैठक में खारिज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने जैसे निर्णय जनता की भावनाओं और क्षेत्रीय पहचान को ध्यान में रखकर ही लिए जाने चाहिए।
सियासी बयानबाजी तेज
नाम बदलने के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जहां सत्ता पक्ष ने इस प्रस्ताव को क्षेत्रीय विकास के नजरिए से सही ठहराने की कोशिश की, वहीं महापौर और उनके समर्थकों ने इसे अव्यवहारिक और राजनीतिक एजेंडा करार दिया।
जनता की प्रतिक्रिया
इस विवाद पर रायपुर की जनता में भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग नाम बदलने के प्रस्ताव को अनावश्यक बताते हैं, तो कुछ का मानना है कि ऐसे फैसले क्षेत्रीय विकास की पहचान से जुड़े होने चाहिए।
निष्कर्ष:
भाटागांव का नाम बदलने का प्रस्ताव भले ही खारिज कर दिया गया हो, लेकिन इस मुद्दे ने रायपुर की राजनीति में गर्मी जरूर बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
