अक्षय डाहट, रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नेशनल हाईवे रायपुर – जगदलपुर के डुमरतराई स्थित करोड़ों की बेशकीमती बेनामी संपत्ति का बड़ा फर्जीवाड़ा फूटा है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासनकाल के दौरान राजधानी सहित प्रदेश भर में जमीनों के कई फर्जीवाड़ों के मामले सामने आए थे। राज्य में सरकार बदली और आम जनता को विश्वास था कि अब भाजपा के शासनकाल में ऐसे भूमाफियाओं पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा की सुशासन वाली सरकार नकेल कसेगी। लेकिन भाजपा सरकार में अब भी हालात वही के वहीं है।
दरअसल पूरा मामला राजधानी के रायपुर – जगदलपुर नेशनल हाईवे के डुमरतराई स्थित मेन रोड की जमीन का है। जहां पंडरी स्थित होलसेल के कपड़ा व्यवसायी और देवेन्द्र नगर निवासी मखीजा परिवार का कहना है कि यह जमीन उनकी है। लेकिन अब किसी महेश गोयल और विशाल शर्मा नामक व्यक्तियों ने फर्जी तरीके से यह जमीन अपने नाम पर रजिस्ट्री करा कर कब्जा कर ली है। कपड़ा व्यवसायी की पत्नी पुष्पा मखीजा जो इस जमीन को अपना होने का दावा कर रही है, उनके पास जमीन के स्वामित्व के कोई भी दस्तावेजी प्रमाण नही है और यह पूरा का पूरा मामला आपस में लेनदेन कर जमीन की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराकर करोड़ों रूपए की जमीन डकारने का मामला है। माखीजा परिवार का कहना है जिनके नाम पर बैनामा पंजीयन इनके द्वारा कराया गया वो सब इनके कर्मचारी और समाज कके व्यक्ति थे। इस पूरी 4 एकड़ की जमीन को आयकर विभाग में इन्होंने डिक्लेरेशन देकर आईडीएस स्कीम के तहत अपने नाम पर करवाई थी और आयकर में घोषित भी की थी। इसमें से 2 एकड़ जमीन सिन्धी समाज के बड़े नेता और पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी को बेची गई थी। माखीजा परिवार के अनुसार बेचीं गई जमीन का भी पूरा हिसाब किताब नहीं हुआ है।
जानिए किस तरह से राजधानी के नेशनल हाइवे की 4 एकड़ की जमीन के बंदरबांट की पूरी कहानी:
रायपुर के पंडरी कपड़ा मार्केट के एक व्यवसायी शीतल दास माखीजा का कहना है कि डुमरतराई स्थित नेशनल हाइवे पर कमल विहार गेट के सामने उनकी 4 एकड़ की जमीन परिवार की है। ये परिवार की बेनामी संपत्ति थी। जिसमें से 2 एकड़ भूमि को पूर्व में साथ के नेता और पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी को बेच दी गई थी। बची हुई जमीन जिसे फर्जी तरीके से कुछ भूमाफियाओं द्वारा अपने कब्जे में कर लिया गया है। माखीजा का कहना है कि उसने यह जमीन अपने समाज के ही लाखे नगर निवासी 9 लोगों के नाम से खरीदी थी, जिनमें से अब 3 की मृत्यु हो चुकी है। इस जमीन के लिए बकायदा मोदी सरकार द्वारा आयकर योजना 2016 में डिक्लेयर कर वर्ष 2018 में हक त्याग विलेख कर उप पंजीयक कार्यालय, रायपुर में पंजीकरण किया गया था। यही से भूमाफियाओं और उनके दलालों का खेल शुरू हुआ, इस जमीन के असली 9 मालिकों की जगह 9 फर्जी लोगों को ले जाकर फर्जी पेन कार्ड और आधार कार्ड बनवाकर 2 एकड़ की दुर्ग जिले के पाटन विकासखण्ड में फर्जी पावर आफ अटर्नी तैयार की गई। प्रशांत शर्मा के नाम पर इस फर्जी पॉवर ऑफ अटॉर्नी को फरवरी 2024 में तैयार किया गया था। जबकि महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि फर्जी पॉवर ऑफ अटॉर्नी में जब 9 में से 3 की मृत्यु हो चुकी है तो फिर उनके हस्ताक्षर कहां से आए?
इसके बाद यह जमीन हीरापुर स्थित सुनील डेयरी निवासी गजानंद मेश्राम को 1 करोड़ 70 लाख में बेची जाती है फिर दुबारा इसी जमीन को महेश गोयल पिता दयानंद गोयल तथा विशाल शर्मा पिता राजकुमार शर्मा को 2 करोड़ इकतालीस लाख में बेची जाती है जिसका सिर्फ कागजी लेनदेन दर्शाया जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि पहले जिस गंजानाद मेश्राम ने जमीन खरीदी फिर जिस विशाल शर्मा ने जमीन खरीदी दोनों का ही घर का पता हूबहू एक है, मकान का नंबर भी एक है ऐसा क्या संभव है?

हमारी पड़ताल में इस पूरे मामले के कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
डुमरतराई स्थित नेशनल हाइवे रोड की जमीन के स्वामित्व का दावा कर रहे कपड़ा व्यवसायी शीतल दास मखीजा के पास जमीन का कोई दस्तावेजी प्रमाण मौजूद नहीं। पूर्व में मृत 3 व्यक्तियों के हस्ताक्षर आखिर फर्जी पॉवर ऑफ अटॉर्नी बनाने के दौरान कैसे लिए गए? रायपुर के डूमरतराई के नेशनल हाइवे रोड की जमीन का पाटन के उप पंजीयक कार्यालय से क्या लेना-देना ? जबकि बेचने वाले और खरीदने वाले और जमीन भी रायपुर में स्थित है।
इस पूरे मामले में माना थाना प्रभारी का कहना कि शीतलदास माखीजा को बयान के लिए कई बार बुलाया गया नोटिस भेजा गया फिर भी थाने नही आए? वहीं व्यापारी शीतलदास का कहना कि थाने से किसी प्रकार का बुलावा या नोटिस आज तक नही आया। पुलिस की कार्यप्रणाली संदेह के दायरे में। पहले जमीन खरीदने वाले गजानंद मेश्राम तथा दोबारा खरीदने वाले विशाल शर्मा का पता, मकान नंबर हूबहू एक कैसे हो सकता है? दुर्ग जिले के पाटन उप पंजीयक ने मामले को गंभीरता से तो लिया लेकिन कैमरे के सामने बात करने से इनकार कर दिया और पूर्व मे पदस्थ अधिकारी शशिकांता पात्रे के कार्यकाल में होना कहकर अपना पल्ला झाड़ लेना संदेहास्पद है। इस पूरे मामले में जब संदेही विशाल शर्मा से बात कर अपना पक्ष रखने कहा जाता है तो कल मिलता हूं, फोन करता हूं कहां जाता है। गजानंद मेश्राम ने भी 2 दिन 5 दिन बाद मिलता हूं, कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। लेकिन हमारे संवाददाता और पूरी टीम को आज तक गजानंद मेश्राम मिला ही नही। सबसे बड़ी बात है की इस जमीन के सौदे में पूरा पैसों का लेन-देन सिर्फ कागजों में दर्शाया गया है भौतिक तौर पर कभी भी पैसों का लेन-देन हुआ ही नहीं। इस तरह भूमाफियाओं ने राजधानी रायपुर के नेशनल हाइवे मेन रोड की लगभग 2 एकड़ की जमीन का फर्जीवाड़ा कर डाला और राजस्व विभाग, शासन-प्रशाशन मुंह ताकते रह गया।

मामले पर अब कलेक्टर से शिकायत करने की माँग:
राजधानी रायपुर के डुमरतराई स्थित नेशनल हाइवे रोड की जमीन के फर्जीवाड़ा कर बंदरबांट का मामला अब कलेक्टर कार्यालय में की जाने की माँग उठ रही है। नाम पता ना बताने की शर्त पर कुछ लोगों का कहना है कि काफी लंबे समय से यह फर्जीवाड़ों का सिलसिला चलता आ रहा है जिसकी निश्चित रूप से जाँच पड़ताल की जानी चाहिए क्योंकि इसमें राजस्व विभाग के कुछ बड़े अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने दिखाई दे रही है।
एक तरफ जहां भाजपा ने सरकार बनने के पहले तथा बाद में भी कई बार घोषणा तो जरूर की परंतु अमल दिख नहीं रहा है। उनके सरकार में भूमाफियाओं पर नकेल कसी जाएगी अवैध जमीनों पर कब्जा करने वालों को बक्शा नहीं जाएगा लेकिन यह सब सिर्फ एक जुमला साबित हो रहा है, ज़मीनी स्तर पर ही दिखाई नहीं पड़ रहा है। भूमाफियाओं और उनके दलालों के हौसले बुलंद भी नजर आ रहा हैं।
अब यह गौरतलब होगा कि क्या मुख्यमंत्री साय की सुशासन वाली सरकार ऐसे भूमाफियाओं और उनके दलालों पर कोई कार्यवाही करती है या फिर ऐसे ही भूमाफियाओं और उनके दलाल इसी तरह जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर कई करोड़ों की जमीनों का फर्जीवाड़ा कर आपस में बंदरबांट करते ही रहेंगे। इसमे दबी जबान में कुछ लोगों का यह भी कहना है कि पाटन में रचीं गई साजिश में पाटन वाले दाऊ और जिसे छत्तीसगढ़ में कका कह कर संबोधित किया जाता है उनका इस जमीन में विशेष रूझान है, और इसी जमीन की एक रजिस्ट्री उनके दायें हाथ के सिपहसालार जो अभी रायपुर सेन्ट्रल जेल में शराब घोटाले में बंद हैं उसके नाम पर भी की गई है।