PM Modi High-Level Meeting : नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ रहा है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम प्रधानमंत्री आवास पर एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जो करीब साढ़े तीन घंटे तक चली। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोलियम, गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की गहन समीक्षा की गई।
बैठक में शामिल प्रमुख हस्तियां
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य फोकस मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की ऊर्जा तैयारियों को मजबूत करने पर रहा।
पीएम मोदी के निर्देश और फोकस क्षेत्र
प्रधानमंत्री ने बैठक में पेट्रोलियम उत्पादों, कच्चे तेल, एलपीजी, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने लॉजिस्टिक्स को स्थिर रखने, वितरण व्यवस्था को मजबूत करने और देशभर में बिना किसी रुकावट के सप्लाई बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए वैश्विक घटनाक्रम पर निरंतर नजर रखी जा रही है।
मिडिल ईस्ट संकट का प्रभाव और होर्मुज जलडमरूमध्य
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से ऊर्जा परिवहन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और गैस गुजरता है। इस रूट पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में एलपीजी, कच्चे तेल और उर्वरकों की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने पहले भी इस संकट को वैश्विक ऊर्जा संकट करार देते हुए इसे राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा बताया था और शांति, धैर्य तथा जन जागरूकता के साथ स्थिति संभालने की अपील की थी।
सरकार की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संपर्क
सरकार इंटरनेशनल सप्लाई चेन में रुकावटों को दूर करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल के दिनों में सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, ओमान, फ्रांस, मलेशिया, इजराइल और ईरान समेत कई देशों के नेताओं से फोन पर बात की है। इन बातचीत में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की निंदा की गई और होर्मुज स्ट्रेट से मुक्त आवागमन पर जोर दिया गया। सरकार वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने और रणनीतिक भंडारण का उपयोग कर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर फोकस कर रही है।
