Papmochani Ekadashi: नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पापमोचनी एकादशी को अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसे मानसिक शांति और आध्यात्मिक शुद्धि मिलती है। चैत्र महीने की कृष्ण पक्ष की यह एकादशी इस साल 15 मार्च 2026, रविवार को है, जबकि इसका पारण 16 मार्च को किया जाएगा।
व्रत का आध्यात्मिक महत्व
एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन चावल का सेवन वर्जित है और सात्विक भोजन के साथ व्रत रखना पुण्यकारी माना जाता है। पापमोचनी एकादशी विशेष रूप से जीवन में अनजाने में किए गए पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति के लिए मनाई जाती है।
पौराणिक कथा: ऋषि और मंजुघोषा
कथा के अनुसार, एक ऋषि वन में कठोर तपस्या कर रहे थे। उनकी तपस्या को देखकर इंद्र भयभीत हो गए और मंजुघोषा नामक अप्सरा को भेजा, ताकि वह ऋषि की तपस्या भंग कर दे। मंजुघोषा की सुंदरता और संगीत से ऋषि मोहित हो गए और उनकी तपस्या विफल हो गई।
कुछ वर्षों बाद, जब मंजुघोषा स्वर्ग लौटना चाहीं, तो ऋषि ने क्रोध में उन्हें पिशाचिनी का श्राप दे दिया। बाद में मंजुघोषा ने क्षमा याचना की और ऋषि ने उन्हें प्रायश्चित के लिए पापमोचनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। श्रद्धा के साथ व्रत करने पर मंजुघोषा पिशाच योनि से मुक्त होकर पुनः अप्सरा बन गई और ऋषि के सभी पाप भी नष्ट हो गए।
पापमोचनी एकादशी क्यों मनाई जाती है
शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से जीवन के सभी पाप दूर होते हैं। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, व्रत रखते हैं और जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य कमाते हैं। यह व्रत जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति लाने में मदद करता है।
व्रत के दौरान करने योग्य कार्य
- जरूरतमंदों की सहायता करना।
- सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करना।
- भगवान विष्णु की पूजा और भोग में तुलसी का प्रयोग करना।
- पवित्र नदियों में स्नान करना।
पापमोचनी एकादशी न केवल पापों के नाश का प्रतीक है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाने का भी माध्यम है।
