अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य और अयोध्या राजपरिवार के मुखिया विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का शनिवार की रात लगभग 11:30 बजे निधन हो गया। 71 वर्षीय मिश्र लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे थे। अचानक राजमहल में उनकी तबीयत बिगड़ी और डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मृत्यु हृदय गति रुकने से हुई।
उनके निधन की खबर फैलते ही पूरा अयोध्या शोक की लहर में डूब गया। राजसदन परिसर में लोगों की भीड़ जुट गई और हजारों लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उनका अंतिम संस्कार आज रविवार शाम 4 बजे सरयू तट पर किया जाएगा।
सीएम योगी ने जताया संवेदना
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा –
“श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के माननीय सदस्य एवं अयोध्या राजसदन के मुखिया श्री विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र जी का निधन अत्यंत दुःखद है। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें और परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।”

शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में बड़ा योगदान
विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र न सिर्फ अयोध्या के राजा के रूप में जाने जाते थे, बल्कि उन्होंने शिक्षा और सामाजिक संस्थाओं में भी उल्लेखनीय कार्य किए। वह धर्म सेतु वक्फ के चेयरमैन और महाराजा इंटर कॉलेज व महाराजा पब्लिक स्कूल समेत कई संस्थानों के संस्थापक न्यासी थे।
राजनीतिक सफर
मिश्र ने 2009 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर फैजाबाद लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। इसके बावजूद वह अयोध्या की राजनीति और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
राजा विमलेंद्र अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके बेटे यतीन्द्र मिश्र प्रसिद्ध कवि, लेखक और साहित्यकार हैं, जो वर्तमान में प्रसार भारती के सलाहकार भी हैं। बीते वर्ष ही उनकी पत्नी का निधन हुआ था।
अयोध्या की धरोहर
लोग उन्हें प्रेम से “राजा साहब” कहकर संबोधित करते थे। वह रामायण मेला संरक्षक समिति से भी जुड़े रहे और हमेशा धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र में रहे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य के तौर पर उनकी भूमिका बेहद अहम रही।