एशिया का सबसे साफ गाँव मावल्यान्नॉन्ग (Mawlynnong) है, जो भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में स्थित है। इसे 2003 में “एशिया के सबसे साफ गाँव” के रूप में घोषित किया गया था। यह अपनी स्वच्छता, सुंदरता, और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की कुछ मुख्य विशेषताएँ और जानकारियाँ इस प्रकार हैं:
Contents
1. गाँव की स्वच्छता:
- गाँव के हर निवासी स्वच्छता को प्राथमिकता देता है। हर घर में कचरा फेंकने के लिए बाँस की टोकरी होती है।
- यहाँ कचरे को जैविक और अजैविक में अलग किया जाता है और गड्ढों में डालकर खाद बनाई जाती है।
- प्लास्टिक और पॉलिथीन पर प्रतिबंध है।
2. प्राकृतिक सुंदरता:
- गाँव चारों ओर हरियाली और स्वच्छ वातावरण से घिरा हुआ है।
- फूलों और पेड़ों से सजे हुए रास्ते पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
- यहाँ के लोग प्रकृति का पूरा ध्यान रखते हैं।
3. जीवित जड़ों के पुल (Living Root Bridges):
- मावल्यान्नॉन्ग के पास स्थित जीवित जड़ों के पुल बेहद खास हैं। इन्हें रबर के पेड़ों की जड़ों को आपस में जोड़कर बनाया गया है और ये पुल कई सालों तक मजबूत रहते हैं।
4. लोकप्रियता:
- 2003 में Discover India Magazine ने इसे एशिया का सबसे साफ गाँव घोषित किया।
- गाँव को “गॉड्स ओन गार्डन” (God’s Own Garden) के नाम से भी जाना जाता है।
5. गाँव के लोग और उनकी जीवनशैली:
- यहाँ के निवासी मुख्य रूप से खासी जनजाति से हैं।
- गाँव के लोग पढ़ाई-लिखाई और सफाई को बहुत महत्व देते हैं।
- उनकी जीवनशैली सादगी और पर्यावरण के अनुकूल है।
6. पर्यटन:
- पर्यटकों के लिए यहाँ कई आकर्षण हैं, जैसे:
- स्काई व्यू टॉवर: यह एक बाँस से बना टॉवर है, जिससे आप भारत और बांग्लादेश की सीमा देख सकते हैं।
- लिविंग रूट ब्रिज: यह पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
- यहाँ होमस्टे और गेस्ट हाउस जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
7. कैसे पहुँचें:
- निकटतम हवाई अड्डा: शिलांग का उमरोई हवाई अड्डा (लगभग 90 किमी)।
- निकटतम रेलवे स्टेशन: गुवाहाटी रेलवे स्टेशन (लगभग 170 किमी)।
- यहाँ सड़क मार्ग से शिलांग और गुवाहाटी से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
8. भाषा और भोजन:
- यहाँ की मुख्य भाषा खासी है, लेकिन लोग हिंदी और अंग्रेज़ी भी समझते हैं।
- खासी जनजाति का पारंपरिक भोजन और बांस से बने व्यंजन पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं।
मावल्यान्नॉन्ग गाँव सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यह हमें स्वच्छता और सामुदायिक भागीदारी का एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है।