हिंदू नववर्ष: महत्व, परंपरा और कारण
हिंदू नववर्ष भारत सहित कई देशों में हिंदू समुदाय द्वारा मनाया जाता है। यह नववर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को शुरू होता है, जिसे विक्रम संवत और शक संवत के रूप में जाना जाता है। इस दिन को गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र), चैत्र नवरात्रि, उगादि (दक्षिण भारत), नव संवत्सर, और चेटीचंड (सिंधी समुदाय) जैसे विभिन्न नामों से मनाया जाता है।
हिंदू नववर्ष मनाने के कारण
1. विक्रम संवत की शुरुआत
हिंदू नववर्ष विक्रम संवत की शुरुआत का प्रतीक है। यह संवत सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल से शुरू हुआ था। उन्होंने शक राजाओं को पराजित करके एक नए संवत्सर (समय चक्र) की स्थापना की थी।
2. ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन भगवान ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इस कारण इसे ब्रह्मा संवत्सर भी कहा जाता है।
3. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत
इस दिन से चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत होती है, जिसमें माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह पर्व शक्ति और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
4. भगवान राम का राज्याभिषेक
ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था, जब वे 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे।
5. महाभारत और अन्य ऐतिहासिक घटनाएं
- महाभारत में बताया गया है कि युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ था।
- गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना भी इसी दिन की थी।
हिंदू नववर्ष मनाने की परंपराएं
- गुड़ी पड़वा – महाराष्ट्र में इस दिन घरों के बाहर गुड़ी (एक विशेष ध्वज) लगाया जाता है, जो विजय और समृद्धि का प्रतीक होता है।
- रंगोली और दीप जलाना – शुभता और सकारात्मकता के लिए घरों में रंगोली बनाई जाती है और दीप जलाए जाते हैं।
- नए संकल्प लेना – लोग इस दिन नए संकल्प लेकर जीवन को सकारात्मक दिशा में बढ़ाने का प्रण करते हैं।
- पंचांग पढ़ना – इस दिन नए वर्ष का पंचांग (राशिफल और भविष्यफल) पढ़ा जाता है।
हिंदू नववर्ष केवल एक कैलेंडर परिवर्तन नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और अध्यात्म से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिवस हमें धर्म, कर्तव्य, और नई शुरुआत का संदेश देता है। इस दिन को पूरे उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है, जिससे यह न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो जाता है।