कोविड-19 महामारी ने सिर्फ फेफड़ों ही नहीं, बल्कि दिल और हार्मोनल सिस्टम पर भी गंभीर असर डाला है। IIT इंदौर और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की संयुक्त स्टडी में यह सामने आया है कि साइलेंट हार्ट अटैक और थायरॉइड संबंधी बीमारियों के मामले कोरोना के बाद तेज़ी से बढ़े हैं। यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ प्रोटिओम रिसर्च में प्रकाशित हुई है।
3,000 से ज्यादा मरीजों पर स्टडी, डेल्टा वैरिएंट सबसे खतरनाक
इस स्टडी के तहत कोविड की पहली और दूसरी लहर में संक्रमित 3,134 मरीजों का विस्तृत मेडिकल डेटा विश्लेषित किया गया। रिसर्च में कोविड-19 के पांच प्रमुख वैरिएंट्स – वाइल्ड टाइप, अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा – के प्रभावों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया।
डेल्टा वैरिएंट ने बिगाड़ा हार्मोनल संतुलन
रिपोर्ट में डेल्टा वैरिएंट को सबसे खतरनाक बताया गया। इससे शरीर में कैटेकोलामाइन और थायरॉइड हार्मोन के pathways में भारी गड़बड़ी देखी गई। ये हार्मोन दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हीं गड़बड़ियों के चलते साइलेंट हार्ट अटैक और थायरॉइड डिसऑर्डर के मामलों में तेजी देखी गई।
हार्मोनल और मेटाबॉलिक सिस्टम पर गहरा असर
शोधकर्ताओं ने पाया कि कोरोना संक्रमण ने न केवल रक्त संबंधी और लिपिड प्रोफाइल को प्रभावित किया, बल्कि ऊर्जा चक्र यानी मेटाबॉलिज्म में भी बदलाव किए। इन सभी परिवर्तनों ने शरीर में ‘साइलेंट’ रूप से कई बीमारियों की नींव रख दी।
2021 में शुरू हुई थी रिसर्च
यह महत्वपूर्ण रिसर्च 2021 में शुरू हुई थी। इसे IIT इंदौर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हेमचंद्र झा और किम्स भुवनेश्वर के डॉ. निर्मल कुमार मोहकुद के नेतृत्व में किया गया। चार वर्षों तक चली इस रिसर्च ने कोविड-19 के दीर्घकालिक असर पर प्रकाश डाला है, जिसे पहले बहुत कम समझा गया था।
निष्कर्ष:
IIT इंदौर और ICMR की इस स्टडी ने एक गंभीर संकेत दिया है कि कोरोना का असर सिर्फ संक्रमण तक सीमित नहीं, बल्कि यह दिल और हार्मोनल सिस्टम पर गहरा प्रभाव छोड़ चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है जब कोविड रिकवरी के बाद की बीमारियों को लेकर भी समाज और स्वास्थ्य प्रणाली को सतर्क रहना होगा।