हज़रत ग़ैबशाह वली के 77वें उर्स पर चादर पेश, सौहार्द और एकता की मिसाल पेश
इंदौर। हज़रत ग़ैबशाह वली के 77वें उर्स के अवसर पर सभी वर्गों के लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ चादर शरीफ पेश कर एकता और भाईचारे का संदेश दिया। इस मौके पर राष्ट्रीय संतों और सर्वधर्म संस्था के अध्यक्ष मंज़ूर बेग की अगुवाई में श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रूप से चादर चढ़ाई।
कार्यक्रम में सर्वधर्म संघ के अध्यक्ष मंज़ूर बेग, अफजल खान पहलवान, चंदू भैया, यूसुफ बाबा, महमूद भाई, रियाज खान, माहिर बाबा, सूफी नौशाद बाबा, हिलाल अहमद चिश्ती, मुश्ताक भाई, साबिर वोरा, मोहम्मद अकबर भाई, सोहेल पठान, शकील खान, नवीन भीलवाड़ा, सूफी बादशाह बाबा, सागर साहब वारसी, आरिफ साहब वारसी, अमित भाऊ, गोलू शेख, जुनैद खान, मोहसिन देहलवी सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि मंज़ूर बेग ने कहा, “सूफी संत देश में एकता की मिसाल हैं। हमें उनके बताए रास्ते पर चलकर सभी धर्मों के बीच प्रेम और सौहार्द बनाए रखना चाहिए।”
इस अवसर पर सूफियाना महफ़िल का आयोजन हुआ, जिसमें कलाकारों ने “ग़ैबशाह वली सरकार तेरे दीवाने आए हैं”, “एक मस्त नज़र डाली, मस्ताना बना डाला” और “ख्वाजा ने जिसे चाहा, दीवाना बना डाला” जैसी कव्वालियों से समां बांध दिया। श्रद्धालुओं के बीच शर्बत, आइसक्रीम और तबर्रुक भी वितरित किया गया।
दरगाह में पारंपरिक रूप से गुलाब के फूल, इत्र और लोबान की धूनी के बीच चादर पेश की गई। उर्स का समापन रविवार को रंग-ए-महफ़िल और लंगर के साथ होगा। इस उर्स की खास बात यह है कि इसमें सभी समुदायों के लोग पूरी श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर दुआ करते हैं।
