नई दिल्ली। भारत में आधार कार्ड पहचान का सबसे मजबूत दस्तावेज माना जाता है, लेकिन अब इसे लेकर सरकार ने सख्त नियम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। असम सरकार ने अपने राज्य में आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया को कड़ा कर दिया है। इसके तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को छोड़कर अन्य सभी 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का नया आधार कार्ड नहीं बनेगा।
घुसपैठ और फर्जीवाड़ा रोकने की योजना
असम में हाल ही में यह देखा गया है कि आधार कार्ड के जरिए अवैध प्रवासी, विशेषकर बांग्लादेश से आए लोग, वोटर कार्ड, राशन कार्ड और निवास प्रमाण पत्र जैसी सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाकर खुद को भारत का नागरिक साबित कर रहे हैं। इसको रोकने के लिए राज्य सरकार ने वयस्कों के आधार पंजीकरण के लिए केवल जिला उपायुक्त (DC) की मंजूरी अनिवार्य करने पर विचार किया है।
कैबिनेट में हुई चर्चा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में अधिकांश लोगों का आधार कार्ड बन चुका है और अब केवल कुछ वयस्कों के आवेदन ही आ रहे हैं। फर्जीवाड़ा रोकने और अवैध घुसपैठियों, विशेष रूप से बांग्लादेशियों, को आधार कार्ड बनवाने से रोकने के लिए सरकार डीसी को आवेदन जांच और मंजूरी देने का अधिकार देगी। इस प्रस्ताव पर आगामी कैबिनेट की बैठक में चर्चा कर इसे मंजूरी दी जा सकती है।
सरकार का उद्देश्य
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस कदम से न केवल फर्जीवाड़ा रोका जाएगा, बल्कि अवैध प्रवासियों के आधार पर सरकारी दस्तावेज बनाने की प्रक्रिया भी पारदर्शी होगी। इसका लक्ष्य राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।