नई दिल्ली। भारत में सोने का भंडार आज भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम भूमिका निभा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक भारत में कुल 879.58 मीट्रिक टन सोने का भंडार मौजूद है। देश की मिट्टी में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां से सोने की खदानें दशकों से सक्रिय हैं और कई स्थानों पर अभी भी सोने की खोज और संभावनाएं बनी हुई हैं।
हाल ही में मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के सिहोरा तहसील के महगवां केवलारी गांव के पास सोने के बड़े भंडार मिलने की पुष्टि हुई है। भूवैज्ञानिकों ने बताया है कि यह खजाना करीब 100 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें लाखों टन सोना मौजूद हो सकता है। यह खोज न सिर्फ क्षेत्रीय आर्थिक विकास में सहायक होगी, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी।
भारत में सोने का महत्व
सोना भारत की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक अनुष्ठानों और आर्थिक निवेश का अहम हिस्सा है। यह न केवल शादी-ब्याह और त्योहारों में प्रयोग होता है, बल्कि देश की आर्थिक मजबूती का भी प्रतीक माना जाता है।
देश की 5 प्रमुख सोने की खदानें
1. हट्टी गोल्ड माइंस, कर्नाटक
यह भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी सोने की खदान है, जिसका इतिहास लगभग 2000 साल पुराना माना जाता है। हट्टी से प्रति वर्ष लगभग 1.8 टन सोना निकाला जाता है और यह खदान आज भी सक्रिय है।
2. कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF), कर्नाटक
1880 में ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई कोलार गोल्ड फील्ड्स ने 2001 तक लगभग 800 टन सोना प्रदान किया। हालांकि फिलहाल यह बंद है, लेकिन इसे पुनः चालू करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने की योजना है।
3. सोनभद्र, उत्तर प्रदेश
2020 में सोनभद्र क्षेत्र में सोने के संभावित बड़े भंडार की खोज हुई थी। अगर यह खोज सफल होती है, तो यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश का प्रमुख गोल्ड हब बन सकता है।
4. रामगिरी गोल्ड फील्ड, आंध्र प्रदेश
रामगिरी क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सोने की खोज के लिए जाना जाता है। यहां भविष्य में सोने के खनन की अच्छी संभावनाएं देखी जा रही हैं।
5. चिगरगुंटा-बिसनाथम, आंध्र प्रदेश
यह क्षेत्र भी सोने के समृद्ध भंडार के लिए प्रसिद्ध है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में यहां से सोने का उत्पादन देश की कुल सप्लाई में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
सोने की खोज से आर्थिक विकास की उम्मीद
मध्य प्रदेश की सिहोरा तहसील में सोने के भंडार मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। साथ ही, यह खोज भारत की आर्थिक वृद्धि में भी सहायक साबित होगी।