राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ विचारक मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ भारतीय चिंतन, संस्कृति और सभ्यता को अपनी ही दृष्टि से समझने का एक गहन विश्लेषणात्मक प्रयास है। भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी का कहना है कि यह पुस्तक “भारत से भारत का परिचय” कराने वाली एक प्रभावी मार्गदर्शिका साबित होती है, जो राष्ट्रबोध और चरित्र निर्माण को समानांतर रखती है।
“यह भारत को जानने और अपनी दृष्टि से देखने का समय है”
प्रो. द्विवेदी के अनुसार, लंबे औपनिवेशिक प्रभाव और मानसिकता से उपजा आत्मदैन्य अब समाप्त हो रहा है। समाज में अपनी पहचान, परंपरा और मूल सिद्धांतों को समझने का नया दौर प्रारंभ हुआ है।
इसी संदर्भ में मनमोहन वैद्य की यह पुस्तक भारतीय सभ्यता, हिंदुत्व, संस्कृति और मूल अवधारणाओं को तर्क और उदाहरणों के साथ सहज संवाद शैली में प्रस्तुत करती है।
संघ और भारत के विमर्श को देती है नया दृष्टिकोण
मनमोहन वैद्य RSS के प्रमुख प्रचारकों में रहे हैं और संगठन के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख व सह-सरकार्यवाह जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली, संवाद क्षमता और संचार कौशल इस पुस्तक में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
पुस्तक पहले अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थी और अब हिंदी संस्करण सुरूचि प्रकाशन, दिल्ली से आया है। संघ के शताब्दी वर्ष के समय इसे व्यापक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरल व प्रेरक संवाद शैली
लेखन में वैद्य की सरल शैली उन्हें एक शिक्षक की तरह स्थापित करती है। वे जटिल विषयों को सहजता से समझाते हैं।
उनका प्रसिद्ध सूत्र—
“भारत को जानो, भारत को मानो, भारत के बनो, भारत को बनाओ”
—युवा चेतना में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है।
चार खंडों में विभाजित पुस्तक
किताब में कुल चार भाग शामिल हैं—
- संघ और समाज – 15 निबंध
- भारत की आत्मा – 14 निबंध
- असहिष्णुता का सच – 8 निबंध
- प्रेरणा शाश्वत है – 5 प्रमुख व्यक्तित्वों पर आधारित लेख
अंतिम अध्याय में उन्होंने डॉ. हेडगेवार, दत्तोपंत ठेंगड़ी, प्रणब मुखर्जी, रंगा हरि और अपने पिता एम. जी. वैद्य को श्रद्धांजलि दी है।
इतिहासकार डॉ. विक्रम संपत की टिप्पणी
डॉ. विक्रम संपत के अनुसार—
“डॉ. वैद्य के निबंध सुंदर गद्य, तथ्य और भावनात्मक संतुलन के साथ अविस्मरणीय पठनीयता प्रदान करते हैं। हर भारतीय के लिए यह समझना आवश्यक है कि हम कौन हैं और कहां जा रहे हैं।”
