छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर और सुकमा जिलों में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 14 नक्सली मारे गए, जबकि भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार बरामद किए गए हैं। सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया यह अभियान हाल के वर्षों में सबसे अहम अभियानों में से एक माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस्तर रेंज के दक्षिणी क्षेत्रों में सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की टीमों को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया था।
शनिवार सुबह बीजापुर जिले में लगभग 5 बजे और सुकमा जिले में करीब 8 बजे से डीआरजी और माओवादियों के बीच रुक-रुक कर मुठभेड़ हुई।
सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ों के बाद 14 माओवादियों के शव बरामद किए, जिनमें से 2 नक्सली बीजापुर और 12 नक्सली सुकमा जिले के बताए जा रहे हैं। मुठभेड़ स्थलों से एके-47, इंसास राइफल, एसएलआर सहित भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया है।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान माओवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग की, जिसके जवाब में कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अब भी सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2025 बस्तर रेंज के लिए ऐतिहासिक और निर्णायक साबित हुआ है। लगातार चलाए गए नक्सल विरोधी अभियानों के चलते शीर्ष माओवादी नेतृत्व को बड़ा झटका लगा, कई वरिष्ठ कैडरों ने आत्मसमर्पण किया और बड़ी संख्या में हथियार बरामद हुए हैं। इन प्रयासों से क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव पड़ी है।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने का सीधा असर अब बस्तर के विकास और जनकल्याण पर भी दिखाई देने लगा है। सड़कों, संचार सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। साथ ही, दूरस्थ इलाकों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच भी सुनिश्चित की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से नक्सल गतिविधियों पर निर्णायक अंकुश लगेगा और बस्तर क्षेत्र शांति, विकास और विश्वास की राह पर तेजी से आगे बढ़ेगा।
