बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों से ठीक पहले असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में AIMIM के पांच निर्वाचित पार्षदों में से चार ने पार्टी छोड़ दी है, जिससे स्थानीय राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
दलबदल करने वाले चार पार्षदों में से दो ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को समर्थन दिया है, जबकि दो पार्षदों ने एनसीपी (अजित पवार गुट) के साथ गठबंधन कर लिया है। इस घटनाक्रम के बाद अकोट नगर परिषद में AIMIM केवल एक पार्षद तक सिमट गई है।
अकोट नगर परिषद का सियासी गणित
अकोट नगर परिषद में कुल 35 सीटें हैं, जिनमें से 33 सीटों पर हाल ही में चुनाव हुए थे। चुनाव परिणामों में भाजपा 11 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि AIMIM ने 5 सीटें जीतकर तीसरा स्थान हासिल किया था। परिषद में सत्ता गठन के लिए 17 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
वर्तमान स्थिति इस प्रकार है—
- भाजपा: 11
- कांग्रेस: 6
- AIMIM: 1
- शिवसेना (उद्धव ठाकरे): 2
- शिंदे गुट (शिवसेना): 1
- एनसीपी (अजित पवार): 2
- एनसीपी (शरद पवार): 1
- वंचित बहुजन आघाड़ी: 2
- प्रहार जनशक्ति पार्टी: 3
भाजपा ने बनाया ‘अकोट विकास मंच’
बोर्ड गठन की दिशा में रणनीतिक कदम उठाते हुए भाजपा ने विभिन्न दलों के पार्षदों को साथ लेकर ‘अकोट विकास मंच’ के नाम से नया गठबंधन गठित किया है। इस मंच में शिंदे सेना, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार), एनसीपी (अजित पवार), प्रहार जनशक्ति पार्टी और AIMIM के चार दलबदलू पार्षद शामिल हैं।
भाजपा ने इस गठबंधन की औपचारिक जानकारी देते हुए अकोला कलेक्टर को पत्र भी सौंप दिया है। इस नए समीकरण के बाद कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी विपक्ष में चली गई हैं।
बीएमसी चुनाव पर असर
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर निगमों के चुनाव होने जा रहे हैं। महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, मुंबई में 15 जनवरी को 227 वार्डों में मतदान होगा, जबकि मतगणना 16 जनवरी को की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 दिसंबर निर्धारित की गई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अकोट नगर परिषद में AIMIM को लगा यह झटका आगामी बीएमसी चुनावों से पहले पार्टी की रणनीति और मनोबल पर असर डाल सकता है।
