देश के कई शहरों में सड़क निर्माण में प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग, स्वच्छ भारत मिशन की बड़ी सफलता
स्वच्छ भारत मिशन देश भर में सिर्फ स्वच्छता के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि कचरा प्रबंधन में भी क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। ‘3R – रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल’ की अवधारणा के तहत प्रतिदिन निकले प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए किए जा रहे नवाचारों में ‘प्लास्टिक वेस्ट टू रोड कंस्ट्रक्शन’ पहल प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई है।
सड़क निर्माण में प्लास्टिक उपयोग की पहल
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की इस पहल को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) के तहत देशभर में बढ़ावा दिया जा रहा है। मंत्रालय ने सभी शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को बिटुमिनस सड़कों में प्लास्टिक कचरे के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया है।
2015 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के 50 किमी दायरे में राष्ट्रीय राजमार्गों के नवीनीकरण में प्लास्टिक वेस्ट को अनिवार्य किया था।
कैसे बनती है प्लास्टिक मिलाकर सड़क
सड़कों के निर्माण में मुख्यतः ड्राई प्रोसेस अपनाई जा रही है, जिसमें प्लास्टिक को गर्म बिटुमेन और एग्रीगेट्स के साथ मिलाया जाता है।
यह तकनीक सड़क को:
- अधिक मजबूत
- जलरोधक
- और टिकाऊ
बनाती है। इसके साथ ही जियोसेल तकनीक का भी प्रयोग शुरू हो गया है। इसका पहला बड़ा फील्ड ट्रायल दिल्ली-NCR के DND–फरीदाबाद–KMP एक्सप्रेसवे पर किया गया है।
किन राज्यों ने दिखाई सबसे ज्यादा प्रगति
- तमिलनाडु: 17,735 किमी सड़कें प्लास्टिक के साथ निर्मित
- बेंगलुरु: 2,000 किमी से अधिक सड़क निर्माण
- हुबली-धारवाड़: 1.1 किमी सड़क में 8% प्लास्टिक, प्रति किमी ₹1.5 लाख बचत
- असम (गुवाहाटी): MES द्वारा 1.24 MT प्लास्टिक से सड़क निर्माण
- लखनऊ–गोमती नगर, गाजियाबाद, दिल्ली–NCR, गुरुग्राम: कई प्रोजेक्ट्स में प्लास्टिक आधारित सड़कें
- RCF कपूरथला (पंजाब): टाउनशिप में प्लास्टिक मिश्रित पर्यावरण-अनुकूल सड़कें
- जमशेदपुर (झारखंड): ‘प्लास्टिक बाय बैक पॉलिसी’ लागू करने वाला पहला निगम
कई नगर निगम स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्लास्टिक संग्रह और श्रेडिंग से जोड़कर आजीविका भी बढ़ा रहे हैं।
स्वच्छता से समृद्धि की ओर कदम
SBM-U 2.0 के तहत लक्ष्य है कि प्लास्टिक समेत सभी ठोस कचरे का 100% वैज्ञानिक प्रबंधन हो और लैंडफिल में जाने वाला कचरा शून्य हो जाए।
प्लास्टिक वेस्ट से सड़क निर्माण की यह पहल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कचरे से कंचन’ अवधारणा को साकार कर रही है और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह तकनीक न सिर्फ स्वच्छता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि शहरों में टिकाऊ, मजबूत और सस्ते सड़क बुनियादी ढांचे का निर्माण भी सुनिश्चित कर रही है — जिससे ‘विकसित भारत’ की राह और मजबूत होती दिख रही है।
