ढाका : बांग्लादेश में तख्तापलट की अटकलों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच देश के अंतरिम प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस का हिंदू समुदाय के प्रति अचानक प्रेम सामने आया है। यूनुस ने हाल ही में अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) के अध्यक्ष स्टीफन श्नेक से मुलाकात में बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा का वादा किया। उन्होंने कहा, “हम 17 करोड़ लोगों का देश हैं, और मेरी जिम्मेदारी है कि सबकी सुरक्षा हो, खासकर अल्पसंख्यकों की।” हालांकि, यूनुस की इस घोषणा को लेकर देश और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहस छिड़ गई है क्या यह वास्तविक चिंता है या इमेज मेकिंग की सियासी रणनीति?
लगातार बढ़ते हमले, सरकार रही नाकाम
2024 के दौरान 1,000 से अधिक हमले हिंदू समुदाय पर दर्ज किए गए, जिनमें मंदिरों को नुकसान, जबरन धर्म परिवर्तन, और महिलाओं के खिलाफ हिंसा शामिल है। स्थानीय अखबार ‘प्रथम आलो’ की रिपोर्ट के अनुसार, यूनुस सरकार इस स्थिति पर नियंत्रण पाने में असफल रही। धार्मिक कट्टरता और मौन प्रशासन के कारण हालात और भी बिगड़ते गए।

भारत ने जताई थी नाराजगी
भारत सरकार ने भी हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए यूनुस प्रशासन से कई बार विरोध दर्ज कराया। बावजूद इसके, ग्राउंड रियलिटी में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। ऐसे में अब यूनुस का यह ‘बदलाव’ लोगों को संदेहास्पद लग रहा है।
क्या यह ‘राजनीतिक सफाई अभियान’ है
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि तख्तापलट की संभावनाओं और विपक्ष तथा सेना के दबाव के बीच यूनुस खुद को साफ-सुथरा दिखाना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार, यूनुस ने अपने करीबी सहयोगियों से कहा है कि वह नहीं चाहते कि इतिहास में उनका नाम ‘धांधली वाले चुनाव’ से जुड़ा हो। इसलिए वे या तो इस्तीफा देने का मन बना चुके हैं या अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने की कोशिश में हैं।
अल्पसंख्यकों की याद क्यों अब
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूनुस वास्तव में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर होते, तो बीते एक साल में सख्त कदम उठाए गए होते। लेकिन मौजूदा स्थिति में उनकी यह पहल छवि सुधारने का अंतिम प्रयास अधिक लग रही है।