विरोध बढ़ने या सुरक्षा बलों के नियंत्रण खोने की स्थिति में तेहरान से निकलने की तैयारी: रिपोर्ट
ईरान द्वारा हाल ही में दुश्मनों के सामने न झुकने और विरोधियों को “घुटने टेकने” पर मजबूर करने के दावे के बीच एक अहम रिपोर्ट सामने आई है। ब्रिटिश अख़बार द टाइम्स के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई कथित तौर पर देश में हालात बिगड़ने की स्थिति में ईरान छोड़ने की एक आकस्मिक (कंटिन्जेंसी) योजना पर काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि देश में अशांति बढ़ती है या सेना और सुरक्षा बल विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में विफल रहते हैं—या फिर खामेनेई के आदेश मानने से इनकार करते हैं—तो 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अपने परिवार और करीबी सहयोगियों के साथ तेहरान छोड़ सकते हैं। इस संभावित पलायन समूह में लगभग 20 लोगों के शामिल होने की बात कही गई है।
उत्तराधिकारी माने जाने वाले बेटे मोजतबा भी योजना में शामिल
द टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित योजना में खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई भी शामिल हैं, जिन्हें उनका संभावित उत्तराधिकारी माना जाता है। सूत्रों का दावा है कि टीम ने पहले से ही निकास मार्गों की रूपरेखा तैयार कर ली है और विदेशों में मौजूद संपत्तियों व नकदी भंडार के माध्यम से रसद सहायता की व्यवस्था भी की गई है।
बशर अल-असद के उदाहरण से प्रेरित रणनीति
कथित पलायन रणनीति पूर्व सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के उदाहरण से प्रभावित बताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2024 में जब विपक्षी बलों ने दमिश्क पर कब्जा किया था, तब असद अपने परिवार के साथ रूस की राजधानी मॉस्को चले गए थे। असद ईरान के करीबी सहयोगी माने जाते रहे हैं।
सेटाड के जरिए विशाल वित्तीय नेटवर्क पर नियंत्रण
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि खामेनेई एक व्यापक और अपारदर्शी वित्तीय नेटवर्क को नियंत्रित करते हैं, जिसका संचालन मुख्य रूप से सेटाड (Setad) के माध्यम से होता है। सेटाड अर्ध-सरकारी धार्मिक ट्रस्टों और संस्थाओं से जुड़ा एक शक्तिशाली समूह है।
वर्ष 2013 में रॉयटर्स की एक जांच में दावा किया गया था कि कंपनियों और अचल संपत्तियों सहित इस नेटवर्क के तहत नियंत्रित संपत्तियों का अनुमानित मूल्य लगभग 95 अरब डॉलर था।
इजरायल के साथ युद्ध के बाद कमजोर हुआ स्वास्थ्य
खुफिया आकलनों के अनुसार, पिछले वर्ष इजरायल के साथ हुए लगभग 12 दिनों के युद्ध के बाद से खामेनेई शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बताए जा रहे हैं। इसके बाद उनकी सार्वजनिक उपस्थिति काफी कम हो गई है और हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनकी अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही है।
द टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष के दौरान उन्होंने कथित तौर पर एक बंकर में शरण ली थी, ताकि इजरायली हमलों में मारे गए कई वरिष्ठ आईआरजीसी (IRGC) कमांडरों जैसी स्थिति से बचा जा सके।
विचारधारा और व्यावहारिकता का संतुलन
रिपोर्ट में कहा गया है कि अयातुल्ला खामेनेई एक ओर जहां अपनी विचारधारा को लेकर बेहद प्रतिबद्ध माने जाते हैं, वहीं दूसरी ओर वे परिस्थितियों के अनुसार व्यावहारिक निर्णय लेने में भी विश्वास रखते हैं। मौजूदा हालात में उनकी कथित आकस्मिक योजना इसी व्यावहारिक दृष्टिकोण का संकेत मानी जा रही है।
