नई दिल्ली।भारत ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के साथ सभी व्यापारिक लेनदेन सीधे रुपये में करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला अमेरिकी डॉलर के दशकों पुराने वर्चस्व को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया परिपत्र के तहत बैंकों को वोस्ट्रो खाते खोलने के लिए पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं होगी, जिससे विदेशी बैंकों के लिए रुपये में लेनदेन आसान हो जाएगा।
ब्रिक्स की ताकत और रुपये का प्रभाव
ब्रिक्स देशों की संयुक्त जनसंख्या करीब 3 अरब और सकल घरेलू उत्पाद लगभग 24 ट्रिलियन डॉलर है। इस समूह में रुपये को मान्यता मिलने से इसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत होगी। वर्तमान में वैश्विक व्यापार का 90% और पेट्रोलियम कारोबार का लगभग 100% डॉलर में होता है, लेकिन 2023 से यह ट्रेंड बदल रहा है। अब 20% तेल लेनदेन गैर-डॉलर मुद्राओं में हो रहा है, और अगर यह बढ़ता है, तो डॉलर का प्रभुत्व कमजोर पड़ सकता है।
वोस्ट्रो खाते का महत्व
वोस्ट्रो अकाउंट एक विदेशी बैंक का किसी देश के स्थानीय बैंक में खोला गया खाता होता है, जो स्थानीय मुद्रा में लेनदेन के लिए उपयोगी है। उदाहरण के लिए, अमेरिकी बैंक यदि भारत में वोस्ट्रो अकाउंट रखता है, तो वह रुपये में सीधे कारोबार कर सकेगा। यह सुविधा आयात-निर्यात को सरल बनाएगी और डॉलर पर निर्भरता घटाएगी, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा।
ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ जवाबी कदम
यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने के बाद आया है, जिसे एक रणनीतिक जवाब माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल आर्थिक, बल्कि भू-रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। रुपये में ट्रेड बढ़ने से एक्सचेंज दर स्थिर रहेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।