Contents
Baby Diet: शिशुओं को ठोस आहार देना शुरू करने से पहले जानें सही तरीका, ताकि अच्छे से हो बच्चे का पोषण
नई दिल्ली:
शिशु के जीवन के पहले छह महीने सिर्फ मां का दूध ही पर्याप्त होता है, लेकिन इसके बाद उसकी पोषण संबंधी ज़रूरतें बढ़ने लगती हैं। ऐसे में सही समय पर और सही तरीके से ठोस आहार की शुरुआत करना बहुत ज़रूरी है। अगर आप पहली बार अपने बच्चे को सॉलिड फूड (ठोस आहार) देने जा रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद उपयोगी हो सकती है।
कब शुरू करें ठोस आहार?
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, शिशु को 6 महीने की उम्र के बाद ठोस आहार देना शुरू किया जा सकता है।
- अगर बच्चा खुद से गर्दन संभालने लगा है, बैठने की कोशिश करता है और खाने में दिलचस्पी दिखाता है, तो ये संकेत हैं कि अब वह ठोस आहार के लिए तैयार है।
शुरुआत किन चीजों से करें?
- शुरुआत हल्के और पचने में आसान आहार से करें।
- मूंग की दाल का पानी, चावल का माड़, साबुत अनाज का दलिया, मैश किया हुआ केला, उबली हुई गाजर या आलू आदि शुरुआती आहार के लिए अच्छे विकल्प हैं।
- एक समय में एक ही नया आहार दें, ताकि यदि किसी चीज से एलर्जी हो, तो तुरंत पहचाना जा सके।
क्या ध्यान रखें?
- गाढ़े से पतले की बजाय पतले से गाढ़े की ओर बढ़ें – शुरुआत में आहार तरल रखें, धीरे-धीरे उसकी गाढ़ापन बढ़ाएं।
- स्वच्छता का विशेष ध्यान दें – बच्चे का खाना बनाने और परोसने वाले सभी बर्तनों को साफ रखें।
- नमक, चीनी और मसालों से परहेज़ करें – एक साल से पहले बच्चों को नमक, चीनी, शहद और ज्यादा मसाले नहीं देने चाहिए।
- बच्चे को खुद खाने का अवसर दें – इससे उसकी समझ और मोटर स्किल्स बेहतर होती हैं।
बचाव के उपाय
- शहद एक साल से कम उम्र के बच्चे को न दें – इससे बोटुलिज़्म नामक गंभीर बीमारी हो सकती है।
- नट्स, अंगूर, पॉपकॉर्न जैसे खाद्य पदार्थ जो गले में अटक सकते हैं, उनसे बचें।
- कच्चा दूध या अधपका अंडा नहीं दें – संक्रमण का खतरा होता है।
धीरे-धीरे बढ़ाएं वैरायटी
- 7 से 9 महीने के बीच आप बच्चे के आहार में फल, सब्जियां, दालें, अंडा की जर्दी, चिकन जैसी चीजें शामिल कर सकते हैं।
- 9 महीने के बाद बच्चे को दिन में तीन बार खाना और दो बार स्नैक्स देने की आदत डालें।
निष्कर्ष:
शिशु को ठोस आहार देना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो उसके शारीरिक और मानसिक विकास की नींव रखता है। अगर इसे सही समय और सही तरीके से किया जाए, तो बच्चे को संपूर्ण पोषण मिलता है और वह बीमारियों से भी बचा रहता है।