रायपुर। प्रख्यात हास्य कवि और पद्मश्री सम्मानित साहित्यकार सुरेंद्र दुबे का गुरुवार को दिल्ली के ACI अस्पताल में हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे लंबे समय से कवि सम्मेलनों और साहित्यिक मंचों पर अपनी विनोदी और व्यंग्यात्मक कविताओं के लिए लोकप्रिय थे। उनके निधन की जानकारी परिवार के एक करीबी सूत्र ने दी, जिससे साहित्यिक जगत में शोक की लहर फैल गई है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर थी पहचान
छत्तीसगढ़ मूल के सुरेंद्र दुबे ने न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी कविताओं के जरिए हास्य, व्यंग्य और समाज की विडंबनाओं को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वे दूरदर्शन, आकाशवाणी और कई टीवी चैनलों पर अपने कविता पाठ के लिए प्रसिद्ध थे।

मिला था पद्मश्री सम्मान
साहित्य के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2010 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा था। वे कवि सम्मेलनों के सुपरस्टार माने जाते थे और उनकी कविताएं आम जनता के दिलों को गहराई से छूती थीं।
साहित्यिक जगत में अपूरणीय क्षति
उनके निधन पर कई लेखकों, कवियों और राजनेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर साहित्य प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा कि “हास्य कविता का एक युग समाप्त हो गया है।”

सुरेंद्र दुबे का जाना साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी रचनाएं, मंचीय प्रस्तुतियां और जीवनदर्शन सदैव नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी।