रायपुर: पटवारियों की हड़ताल से 8,400 से ज्यादा मामले अटके, आम जनता बेहाल
रायपुर: छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने प्रशासनिक कामकाज को पूरी तरह से ठप कर दिया है। हड़ताल के चलते राजस्व विभाग से जुड़े 8,400 से ज्यादा मामले लंबित हो गए हैं, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दफ्तरों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा।
क्यों हड़ताल पर हैं पटवारी?
पटवारी संघ का कहना है कि वे वेतन विसंगतियों को दूर करने, पदोन्नति के नियमों में बदलाव और अतिरिक्त काम के बोझ को कम करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। संघ के मुताबिक, सरकार उनकी मांगों पर लंबे समय से ध्यान नहीं दे रही, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का सहारा लेना पड़ा।
प्रभावित हो रहे जरूरी काम
हड़ताल की वजह से सबसे ज्यादा असर उन कामों पर पड़ा है, जो सीधे आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं।
- जमीन माप और दस्तावेज़: किसानों की जमीन माप और भूमि विवाद से जुड़े मामले रुके हुए हैं।
- प्रमाण पत्र: आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे।
- फसल बीमा: किसानों के फसल बीमा और ऋण संबंधित कार्य भी अधर में हैं।
- जमीन की खरीद-फरोख्त: भूमि पंजीकरण और खरीद-फरोख्त के कामकाज पूरी तरह ठप हैं।
लोगों की परेशानियां बढ़ीं
लंबित फाइलों के कारण लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब तक हड़ताल खत्म नहीं होती, उनके कामों का समाधान संभव नहीं है।
सरकार की कोशिशें नाकाम
राज्य सरकार ने हड़ताल खत्म कराने के लिए कई बार बातचीत का प्रयास किया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अधिकारियों का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह पूरी समस्या का हल नहीं है।
क्या है आगे का रास्ता?
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और पटवारी संघ के बीच सीधा संवाद स्थापित कर त्वरित समाधान निकालना होगा। जनता को राहत पहुंचाने के लिए हड़ताल खत्म करना जरूरी है, क्योंकि लंबित मामलों का असर न केवल राजस्व विभाग पर बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
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