छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के परीक्षा घोटाले में सीबीआई (CBI) की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। इस मामले में सीबीआई ने पहले CGPSC के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया था। अब पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
आरती वासनिक पर कार्रवाई
सीबीआई ने दो दिन पहले राजनांदगांव स्थित आरती वासनिक के घर पर छापा मारा था। छापे के दौरान सीबीआई को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर उनकी गिरफ्तारी हुई। आरती वासनिक पर आरोप है कि वे घोटाले में शामिल थीं और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं की दोषी हो सकती हैं। अब सीबीआई कोर्ट में उनकी रिमांड मांगने की तैयारी कर रही है।
घोटाले का स्वरूप
2019 से 2022 के बीच भूपेश बघेल सरकार के दौरान CGPSC परीक्षाओं के तहत कई भर्तियां हुईं। इन भर्तियों में सिलेक्शन प्रक्रिया को लेकर विवाद उठे।
- 2020 में: CGPSC ने 175 पदों पर भर्ती की थी।
- 2021 में: 171 पदों पर भर्ती की गई थी।
इन भर्तियों में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप लगे। पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी पर यह आरोप भी लगे कि उन्होंने अपने कई रिश्तेदारों को गलत तरीके से नौकरियां दीं।
सीबीआई की जांच
घोटाले की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने मामला सीबीआई को सौंपा।
- टामन सिंह सोनवानी और स्टील कारोबारी श्रवण कुमार गोयल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
- अब आरती वासनिक की गिरफ्तारी से घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
सरकार की कार्रवाई और प्रभाव
CGPSC घोटाला छत्तीसगढ़ की भर्ती प्रक्रिया और शासन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह मामला युवाओं के करियर और रोजगार से जुड़ा होने के कारण और भी संवेदनशील हो गया है।
यह मामला यह दर्शाता है कि कैसे परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं भरोसे को तोड़ सकती हैं। उम्मीद है कि सीबीआई की जांच निष्पक्ष तरीके से मामले को सुलझाएगी और दोषियों को सजा दिलाएगी।
