CG : रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलाव अब दूरस्थ और श्रमिक परिवारों तक पहुंचने लगे हैं। शासन की अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के जरिए मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का संकल्प अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। यह पहल उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बन रही है, जिनके लिए बेहतर शिक्षा कभी एक सपना भर थी।
श्रमिक की बेटी ने रचा सफलता का इतिहास
बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड के ग्राम बिलौरी निवासी पंजीकृत श्रमिक नंदकिशोर कश्यप की पुत्री डिंपल कश्यप ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर राज्य की प्रावीण्य सूची में स्थान हासिल किया है। मेरिट के आधार पर उनका चयन राजनांदगांव के प्रतिष्ठित संस्कार सिटी स्कूल में हुआ है। वर्तमान में वह कक्षा छठवीं में अध्ययनरत हैं और बारहवीं तक निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करेंगी। यह उपलब्धि उनके परिवार के लिए गर्व और खुशी का अवसर है।
शिक्षा का पूरा खर्च वहन करेगा कल्याण मंडल
डिंपल की इस उपलब्धि को और सशक्त बनाते हुए छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने उनकी माध्यमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तक का संपूर्ण खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है। इस निर्णय से परिवार पर आर्थिक बोझ पूरी तरह समाप्त हो गया है और अब डिंपल बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी।
माता-पिता का गर्व और नई उम्मीद
डिंपल के पिता नंदकिशोर कश्यप भावुक होकर बताते हैं कि एक श्रमिक के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है। वे दिन-रात मेहनत इसलिए करते हैं ताकि उनके बच्चों का भविष्य उनसे बेहतर हो सके। शासन की इस योजना ने उनके सपनों को साकार करने का रास्ता दिखाया है।
कश्यप दंपत्ति को विश्वास है कि उनकी बेटी अपनी लगन और परिश्रम से आगे भी सफलता के नए आयाम स्थापित करेगी।
समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण
ग्राम बिलौरी से निकलकर एक प्रतिष्ठित विद्यालय तक का डिंपल का सफर उन सभी बच्चों और परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं। यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि प्रतिभा और मेहनत के साथ यदि सरकारी योजनाओं का सहयोग मिले, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
