शतरंज दुनिया के सबसे ज्यादा दिमागी कसरत कराने वाले खेलों में से एक है । शतरंज का अविष्कार भारत में हुआ था। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि शतरंज खेलने से दिमाग की बैद्धिक क्षमता में सुधार आता है और जटिल प्रश्नों को सुलझाने की शक्ति बढ़ती है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में अंग्रेजी भाषा में छपी दूसरी किताब शतरंज के बारे में थी।
शतरंज दुनिया में खेले जाने वाले सबसे पुराने और सबसे ज्यादा मशहूर इंडोर खेलों में से एक है। इसे दिमागी खेल माना जाता है। शतरंज की बिसात डिमेंशिया के खतरे से बचाती है।
यह दिमाग को तेज करके आईक्यू लेवल को बेहतर बनाता है। इस गेम से सीखने की क्षमता भी तेजी से डेवलप होती है। आइए मनोवैज्ञानिक योगिता कादियान से जानते हैं शतरंज खेलने के मनोवैज्ञानिक फायदे के बारे में हैं।
शतरंज सदियों से खेला जाता रहा है। शतरंज खेलने के लिए क्रिएटिव सोच, स्ट्रैटिजी प्लानिंग और प्रॉब्लम को हल करने की जरूरत होती है। जिसके लिए रोजाना प्रैक्टिस करना चाहिए। इससे धीरे धीरे क्रिएटिविटी में सुधार होता है। वास्तव में, अध्ययनों से पता चला है कि शतरंज खिलाड़ियों की याददाश्त, टाइम मैनेजमेंट और फोकस को बेहतर बनाता है।
शतरंज खेलने से रिश्ते बनाने और खिलाड़ियों के बीच समुदाय की भावना को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है। हमारी दुनिया स्क्रीन से भरी है। एंटरटेनमेंट के दूसरे पहलुओं को ढूंढना कभी-कभी मुश्किल होता है, तो शतरंज एक बेहतर ऑप्शन है।
डिमेंशिया बुजुर्गों में भूलने की समस्या है। इस बीमारी में दिमाग को नुकसान पहुंच सकता है। जिससे व्यक्ति के व्यवहार में धीरे धीरे बदलाव होने लगता है। डिमेंशिया के मरीज सारी चीजें भूलने लगते हैं। उन्हें अपने कामों को निपटाने में अक्सर दूसरों की मदद लेनी पड़ती है। इसमें लोग छोटी-छोटी बातों को भी भूल जाते हैं।
हाल ही में डिमेंशिया को लेकर हुई रिसर्च में पाया गया है कि शतरंज खेलने से किसी भी समस्या का हल तेजी से ढूंढा जा सकता है। मोनाश यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और प्रिवेंटिव मेडिसिन में हुई ये रिसर्च जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित हुई। शोधकर्ताओं ने 70 साल से ज्यादा के 10318 ऑस्ट्रेलियन लोगों पर शोध किया जिनमें उन्होंने पाया कि मेंटल एक्टिविटीज जैसे एजुकेशन क्लास लेना, क्रॉसवर्ड और शतरंज जैसे खेल खेलने वाले लोगों में 9 से 11 फीसदी तक डिमेंशिया होने का खतरा कम हो सकता है। कंप्यूटर पर शतरंज या फिर क्रॉसवर्ड खेलने से भी इस बीमारी के कम होने की आशंकाएं बढ़ती हैं।
शतरंज एक ऐसा खेल है, जिसे बच्चे-बड़े सभी खेलना पसंद करते हैं। शतरंज से व्यक्ति ज्यादा क्रिएटिव बनता है। शतरंज खेलने से मेमोरी बूस्ट होती है। इससे डिप्रेशन, चिंता और अल्जाइमर का खतरा कम हो सकता है।