सूखी या बलगमी खांसी में मुलेठी है रामबाण इलाज: जानिए फायदे, प्रयोग और सावधानियां
खांसी एक आम लेकिन बेहद परेशान करने वाली समस्या है। यह खासतौर पर बदलते मौसम, ठंड, संक्रमण या प्रदूषण के कारण होती है। खांसी दो प्रकार की हो सकती है —
- सूखी खांसी: जिसमें गले में खुजली, जलन और लगातार खांसने की प्रवृत्ति होती है।
- बलगमी खांसी: जिसमें छाती में जकड़न, भारीपन और कफ जमने की समस्या रहती है।
मुलेठी (Licorice) एक ऐसा आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो इन दोनों प्रकार की खांसी में बेहद प्रभावी मानी जाती है।
मुलेठी क्या है?
मुलेठी एक मीठी जड़ होती है, जिसका वैज्ञानिक नाम Glycyrrhiza glabra है। यह आयुर्वेद में सदियों से कफ रोग, श्वास रोग और गले की समस्याओं के इलाज में प्रयोग होती आई है। इसमें मुख्य रूप से ग्लाइसीराइज़िन, फ्लावोनॉइड्स, और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो इसे औषधीय गुणों से भरपूर बनाते हैं।
मुलेठी के फायदे – कैसे और क्यों है रामबाण?
1. गले की खराश और सूखी खांसी में आराम
मुलेठी का ग्लाइसीराइज़िन गले की सूजन को कम करता है और श्वास नली को मॉइस्चराइज़ करता है, जिससे सूखी खांसी में राहत मिलती है।
2. बलगम ढीला करके बाहर निकालने में मदद
मुलेठी प्राकृतिक एक्सपेक्टोरेंट की तरह काम करती है। यह जमे हुए बलगम को ढीला करके बाहर निकालने में सहायक होती है।
3. इम्युनिटी बढ़ाने वाला
इसमें मौजूद एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल तत्व शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं।
4. गले की सूजन और टॉन्सिल्स में राहत
मुलेठी गले के ऊतकों की सूजन को कम करती है और टॉन्सिल्स जैसी समस्याओं में भी उपयोगी मानी जाती है।
मुलेठी इस्तेमाल करने के तरीके
1. मुलेठी चाय
- 1 कप पानी में 1 चम्मच मुलेठी पाउडर डालकर 5-7 मिनट तक उबालें।
- गुनगुना करके पी लें।
- दिन में 1-2 बार लें, खासतौर पर सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले।
2. शहद के साथ सेवन
- आधा चम्मच मुलेठी पाउडर में 1 चम्मच शहद मिलाएं।
- यह मिश्रण सूखी खांसी में रामबाण का काम करता है।
3. मुलेठी की टहनी चूसना
- 1-2 इंच की टहनी लें और धीरे-धीरे चूसें।
- यह गले को कोटिंग करके राहत देती है।
4. भस्म के रूप में
- मुलेठी को अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर आयुर्वेदिक भस्म के रूप में भी लिया जा सकता है। इसके लिए वैद्य की सलाह जरूरी है।
मुलेठी के प्रयोग में सावधानियां
- हाई ब्लड प्रेशर वालों को सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि यह सोडियम रिटेंशन बढ़ा सकती है।
- गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह मुलेठी का सेवन नहीं करना चाहिए।
- 2 हफ्तों से अधिक लगातार सेवन से बचें, खासकर अगर आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं।
- किसी भी आयुर्वेदिक उपचार की तरह, व्यक्तिगत体体-प्रकृति के अनुसार ही इस्तेमाल करें।
निष्कर्ष
मुलेठी एक सरल, प्राकृतिक और बेहद असरदार उपाय है जो गले की कई समस्याओं में राहत देती है, खासतौर पर सूखी और बलगमी खांसी में। अगर इसे सही मात्रा में और सही तरीके से लिया जाए, तो यह किसी भी महंगी दवा से कम प्रभावी नहीं है। फिर भी, अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।