शास्त्रों के अनुसार, चंद्रमा का जन्म ‘कार्तिक पूर्णिमा’ के दिन हुआ था। यह तिथि हिंदू पंचांग में अत्यंत शुभ मानी जाती है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
चंद्रमा के जन्म की पौराणिक कथा
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, चंद्रदेव महर्षि अत्रि और माता अनसूया के पुत्र हैं। एक अन्य कथा में बताया गया है कि समुद्र मंथन के दौरान चौदह रत्नों में से एक चंद्रमा भी थे, जो भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित हुए।
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
- इस दिन गंगा स्नान, दान और दीपदान करने का विशेष महत्व होता है।
- इसे देव दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है।
- इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
इस तिथि को चंद्रमा के जन्म के साथ जोड़ा जाता है, इसलिए इसे “चंद्र जयंती” भी कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से मन की शांति, मानसिक स्थिरता और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।