भगवान शिव ने अपनी तीसरी आँख खोलते ही प्रेम के देवता कामदेव को भस्म क्यों कर दिया, इसका उल्लेख हिंदू पुराणों, विशेष रूप से शिवपुराण और पद्मपुराण में मिलता है। इसका संबंध भगवान शिव के ध्यान, माता पार्वती के तप और कामदेव के प्रयासों से जुड़ा हुआ है।
इस घटना के पीछे की कथा:
जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह कर लिया, तब भगवान शिव अत्यंत शोक में चले गए और गहरे ध्यान (समाधि) में लीन हो गए। इस बीच, संसार में असुरों का अत्याचार बढ़ता जा रहा था।
उधर, भगवान विष्णु और अन्य देवताओं ने देखा कि असुरों को पराजित करने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म आवश्यक है, क्योंकि वही तारकासुर का वध कर सकते थे। लेकिन शिव जी समाधि में लीन थे, और उन्हें पार्वती जी के प्रति आकर्षित करने के लिए कोई उपाय नहीं था।
कामदेव का हस्तक्षेप:
देवताओं ने प्रेम के देवता कामदेव से प्रार्थना की कि वे शिवजी की समाधि भंग करें, ताकि वे पार्वती जी की ओर आकर्षित हों और विवाह संपन्न हो सके।
कामदेव ने अपनी शक्ति का उपयोग कर शिवजी के मन में प्रेम और आकर्षण की भावना जगाने के लिए पुष्पबाण (कामबाण) चलाया। जैसे ही कामदेव का बाण भगवान शिव को लगा, उनकी समाधि भंग हो गई।
शिवजी का क्रोध और कामदेव का भस्म होना:
भगवान शिव को जैसे ही यह पता चला कि उनकी ध्यानावस्था को भंग किया गया है, वे अत्यंत क्रोधित हो गए। गुस्से में उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी, जिससे कामदेव तुरंत भस्म हो गए।
कामदेव का पुनर्जन्म:
कामदेव की पत्नी रति अत्यंत दुखी होकर शिवजी से विनती करने लगीं। तब शिवजी ने उन्हें वरदान दिया कि कामदेव बिना शरीर के अनंग रूप में जीवित रहेंगे और सभी जीवों में प्रेम और आकर्षण उत्पन्न करेंगे। बाद में, कामदेव का पुनर्जन्म भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में हुआ।
इस घटना का आध्यात्मिक संदेश:
- शिव की तीसरी आंख ज्ञान और योग का प्रतीक है – जब कोई ध्यान और संयम की अवस्था में होता है, तो सांसारिक इच्छाएँ भस्म हो जाती हैं।
- कामदेव का भस्म होना यह दर्शाता है कि वासनाएँ नश्वर हैं, लेकिन प्रेम शाश्वत है।
- कामदेव का अनंग रूप में रहना यह संकेत देता है कि प्रेम और आकर्षण भले ही अदृश्य हों, लेकिन संसार में सदा विद्यमान रहते हैं।
निष्कर्ष:
भगवान शिव ने कामदेव को इसलिए भस्म किया क्योंकि उन्होंने उनकी गहरी तपस्या को भंग किया था। लेकिन शिवजी ने रति के अनुरोध पर उन्हें अनंग रूप में पुनर्जीवित कर दिया, जिससे प्रेम और आकर्षण की भावना सृष्टि में बनी रही।