छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की नृशंस हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। उनकी लाश बैडमिंटन कोर्ट परिसर के सेप्टिक टैंक से बरामद हुई। इस हत्या को इतनी बर्बरता से अंजाम दिया गया कि उनके सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर ढाई इंच गहरा घाव किया गया और गला घोंटकर मार दिया गया। इसके बाद सेप्टिक टैंक को 4 इंच कंक्रीट से ढलाई कर पैक कर दिया गया।
हत्या का खुलासा
1 जनवरी की शाम को मुकेश चंद्राकर घर से लापता हुए थे। उनके भाई ने 2 जनवरी को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने फोन लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की।
पुलिस ने चट्टानपारा में स्थित बैडमिंटन कोर्ट परिसर की जांच की, जो मुकेश के रिश्तेदार ठेकेदार सुरेश चंद्राकर का था। सेप्टिक टैंक को संदेहास्पद देखकर तोड़ा गया, जहां मुकेश का शव मिला।
मामले की पृष्ठभूमि
मुकेश ने हाल ही में 120 करोड़ की लागत से बनी सड़क परियोजना में भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। बताया जा रहा है कि यह परियोजना ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के अधीन थी। इस रिपोर्ट के बाद ठेकेदार ने कई बार मुकेश से संपर्क करने की कोशिश की और विवाद बढ़ता चला गया।
आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 3 अन्य हिरासत में हैं। मुख्य आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्राकर और उनके भाई रितेश चंद्राकर भी संदेह के घेरे में हैं।
पत्रकारों का आक्रोश
इस निर्मम हत्या के विरोध में पत्रकारों ने नेशनल हाईवे-63 पर चक्का जाम किया, जो 2 घंटे तक चला। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि बस्तर क्षेत्र में पहले नक्सली खतरा हुआ करते थे, लेकिन अब भ्रष्टाचार और माफिया गतिविधियां नया खतरा बन गई हैं।
मुख्यमंत्री का बयान
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटना पर गहरा शोक जताया और अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि यह पत्रकारिता और समाज दोनों के लिए अपूरणीय क्षति है।
जांच जारी
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी सबूत जुटाए हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मामले का पूरी तरह खुलासा होगा।
सवाल और चिंता
इस घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या पत्रकारों को निष्पक्षता से काम करने के लिए सुरक्षित माहौल मिल पाएगा?
यह घटना केवल एक हत्या नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला है। दोषियों को सख्त सजा मिलने से ही पत्रकारिता को सुरक्षित रखने का संदेश दिया जा सकेगा।
