छत्तीसगढ़ का राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना (Hill Myna) है। इसे स्थानीय रूप से ‘बसंत बक्शी’ भी कहा जाता है। यह पक्षी न केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि पूरे देश में अपनी सुंदरता और अनोखी आवाज के लिए प्रसिद्ध है।
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पहाड़ी मैना के बारे में पूरी जानकारी:
वैज्ञानिक नाम:
ग्रैकुला रिलिजियोसा (Gracula religiosa)
परिवार:
स्टर्निडे (Sturnidae)
रंग-रूप:
- इसका शरीर मुख्यतः चमकदार काले रंग का होता है।
- पंखों पर सफेद धारियां होती हैं, जो इसे उड़ते समय खास बनाती हैं।
- चोंच और पैर नारंगी-पीले रंग के होते हैं।
- सिर के पास पीले रंग की एक खास पट्टी होती है, जो इसे अन्य मैना पक्षियों से अलग पहचान देती है।
प्राकृतिक वास:
पहाड़ी मैना जंगलों में रहना पसंद करती है। यह घने वृक्षों वाले क्षेत्रों, पहाड़ी इलाकों और नदी किनारे पाई जाती है। छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा जैसे वन क्षेत्रों में इसे बड़ी संख्या में देखा जा सकता है।
भाषा और बोलने की क्षमता:
- यह पक्षी अपनी आवाज की नकल करने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता है।
- पहाड़ी मैना इंसानों की आवाज और अन्य पक्षियों की ध्वनियों की हूबहू नकल कर सकती है।
- इसे “बोलने वाला पक्षी” भी कहा जाता है।
आहार:
- यह मुख्यतः फल, बीज, छोटे कीड़े और फूलों का रस खाती है।
- जंगली इलाकों में यह आसानी से अपनी भोजन सामग्री जुटा लेती है।
प्रजनन:
- पहाड़ी मैना का प्रजनन काल आमतौर पर मानसून के दौरान होता है।
- यह अपना घोंसला पेड़ों की शाखाओं में बनाती है।
- एक बार में यह 2-3 अंडे देती है।
संरक्षण:
- छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे राजकीय पक्षी घोषित कर इसकी संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए हैं।
- जंगलों की कटाई और अवैध शिकार इसके लिए खतरनाक हैं।
- राज्य सरकार और स्थानीय समुदाय इसे बचाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
महत्व:
- पहाड़ी मैना छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है।
- इसकी मधुर आवाज और सुंदरता ने इसे राज्य का गौरव बनाया है।
छत्तीसगढ़ में पहाड़ी मैना को देखना न केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए आनंददायक अनुभव है, बल्कि यह राज्य की संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।