छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में स्थित खरोद को “छत्तीसगढ़ का काशी” कहा जाता है। यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। खरोद महानदी के तट पर स्थित है और यहाँ कई प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल हैं जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
प्रमुख आकर्षण:
- लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर
- यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और खरोद की पहचान है। इसे 7वीं-8वीं शताब्दी का माना जाता है और इसकी वास्तुकला नागर शैली की है।
- मंदिर में शिवलिंग की स्थापना और कलाकृतियाँ इसे ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।
- खरौद का ऐतिहासिक महत्व
- माना जाता है कि खरोद का नाम महाभारत काल से जुड़ा है। यह स्थान ऋषि-मुनियों और तपस्वियों की तपोभूमि रहा है।
- इसे भगवान राम के भाई लक्ष्मण के साथ भी जोड़ा जाता है, और यहाँ के मंदिर का नाम भी लक्ष्मणेश्वर महादेव है।
- मेला और उत्सव
- महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ भव्य मेला आयोजित होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।
- अन्य धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी खरोद को जीवंत बनाते हैं।
क्यों है “काशी” की उपमा?
खरोद को छत्तीसगढ़ का काशी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार काशी को मोक्ष का द्वार माना जाता है, उसी प्रकार खरोद में भी आध्यात्मिक शांति और धार्मिक अनुभव की अनुभूति होती है।
यह स्थान न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि प्राचीन स्थापत्य कला और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को भी प्रदर्शित करता है।
