‘मास्टर्स ऑफ द यूनिवर्स’ की नई फिल्म को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है जेरेड लेटो का स्केलेटर के रूप में नजर आना। अपने किरदारों में पूरी तरह डूब जाने के लिए मशहूर लेटो से इस बार भी दर्शकों को कुछ अलग और गहराई भरा देखने की उम्मीद है।
फिल्म के निर्देशक ट्रैविस नाइट ने स्केलेटर के इस नए अवतार को ‘टॉक्सिक मस्कुलिनिटी’ का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि यह किरदार केवल एक ताकतवर विलेन नहीं होगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि कैसे ताकत की भूख, असुरक्षा और भावनाओं को दबाने की प्रवृत्ति किसी इंसान को धीरे-धीरे अंधेरे की ओर धकेल देती है।
विलेन नहीं, एक मानसिक संघर्ष की कहानी
आमतौर पर टॉक्सिक मस्कुलिनिटी को गुस्सा, अहंकार और कमजोरी छुपाने की आदत से जोड़ा जाता है—और स्केलेटर के किरदार में ये सभी तत्व साफ नजर आते हैं। जेरेड लेटो की खासियत यही है कि वे केवल ही-मैन को चुनौती देने वाला खलनायक नहीं गढ़ते, बल्कि उस किरदार के भीतर छिपे डर, असुरक्षा और मानसिक संघर्ष को भी पर्दे पर उतारते हैं।
ट्रैविस नाइट का विज़न पारंपरिक अच्छाई-बुराई की कहानी से कहीं आगे जाता है। उनका फोकस इस सवाल पर है कि कोई इंसान आखिर इतना क्रूर और नकारात्मक बनता कैसे है।
मर्दानगी की पारंपरिक सोच पर सवाल
जेरेड लेटो का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वे किसी भी रोल के लिए खुद को पूरी तरह बदलने से नहीं हिचकते—चाहे वह शारीरिक बदलाव हो या मानसिक तैयारी। इस फिल्म में उनका स्केलेटर दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करेगा कि क्या मर्दानगी का मतलब सिर्फ ताकत और प्रभुत्व ही होता है।
‘मास्टर्स ऑफ द यूनिवर्स’ जैसी सीरीज़, जो हमेशा हीरोइज़्म और बहादुरी के लिए जानी जाती रही है, उसमें स्केलेटर का यह नया और गहराई भरा रूप समाज के लिए एक मजबूत संदेश लेकर आएगा।
सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, एक बहस की शुरुआत
कुल मिलाकर, यह फिल्म सिर्फ एक एक्शन-फैंटेसी नहीं होगी, बल्कि ताकत, पहचान और मर्दानगी को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ने का काम करेगी। जेरेड लेटो का स्केलेटर पर्दे पर ऐसी छाप छोड़ सकता है, जो दर्शकों की सोच को बदलने पर मजबूर कर दे।
फिल्म के रिलीज़ के साथ ही इसे आने वाले समय की सबसे चर्चित हॉलीवुड फिल्मों में गिना जाना तय माना जा रहा है।
