भारत और अमेरिका के बीच महीनों से चल रहे टैरिफ विवाद पर आखिरकार सहमति बनने के बाद कूटनीतिक गलियारों में एक नाम खास चर्चा में है—अमेरिका के भारत में राजदूत और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सर्जियो गोर। बताया जा रहा है कि भारत पहुंचने के महज 21 दिनों के भीतर उन्होंने दोनों देशों के बीच संवाद की रफ्तार तेज कर टैरिफ मुद्दे पर सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पिछले तीन हफ्तों में दोनों देशों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापार प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका का दौरा किया, वहीं अमेरिकी अधिकारी भी नई दिल्ली पहुंचे। इस तेज कूटनीतिक गतिविधि के केंद्र में सर्जियो गोर की सक्रिय भूमिका रही।
कौन हैं सर्जियो गोर?
सर्जियो गोर का जन्म 1986 में ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) में हुआ। 1999 में उनका परिवार अमेरिका चला गया। वे 2020 के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ अभियान के दौरान ट्रंप टीम से जुड़े और 2024 में ट्रंप के पदभार ग्रहण करने के बाद व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय के निदेशक बने। जनवरी में उन्हें भारत में अमेरिका का राजदूत नियुक्त किया गया। सीनेट की सुनवाई के दौरान उन्होंने भारत को “रणनीतिक साझेदार” बताया था।
भारत आते ही तेज हुई बातचीत
पदभार संभालते ही गोर ने स्पष्ट किया कि मतभेदों के बावजूद भारत और अमेरिका के रिश्ते मजबूत हैं और बातचीत से समाधान निकलेगा। उस समय कुछ अमेरिकी अधिकारियों द्वारा देरी के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था, जिसे भारत ने खारिज किया। ऐसे माहौल में गोर ने संवाद की सकारात्मक दिशा बनाए रखने का प्रयास किया।
कैसे सुलझा टैरिफ विवाद?
सूत्रों के अनुसार, गोर ने दोनों पक्षों के व्यापार अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाया, लंबित मुद्दों की प्राथमिकता तय कराई और उच्च-स्तरीय बैठकों की श्रृंखला सुनिश्चित की। परिणामस्वरूप, टैरिफ दरों में राहत और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने वाला कदम है। गोर की ट्रंप के साथ नजदीकी और भारत-अमेरिका संबंधों पर उनकी स्पष्ट समझ ने बातचीत को गति देने में मदद की।
इस घटनाक्रम ने यह दिखाया कि सक्रिय कूटनीति, निरंतर संवाद और राजनीतिक इच्छाशक्ति से जटिल व्यापारिक विवाद भी कम समय में सुलझाए जा सकते हैं।
