इलेक्ट्रोलाइट्स और फर्मेंटेशन गुणों की वजह से चर्चा में ‘अचार का पानी’, लेकिन मात्रा पर रखें सख्त नियंत्रण
फिटनेस और हेल्थ कम्युनिटी में इन दिनों Pickle Juice (अचार का पानी) तेजी से ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया पर इसे मसल क्रैम्प्स से राहत, डाइजेशन सुधारने और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाने का आसान घरेलू उपाय बताया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यही नुस्खा पहले दादी-नानी पेट की गड़बड़ी या कमजोरी में अपनाया करती थीं, जो अब मॉडर्न हेल्थ ट्रेंड के रूप में लौट आया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिकल जूस में मौजूद सोडियम, पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में नमक-पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। एक्सरसाइज के बाद होने वाले मसल क्रैम्प्स में भी कुछ लोगों को इससे राहत मिलती है। फर्मेंटेशन प्रक्रिया के कारण इसमें हल्के प्रोबायोटिक गुण भी हो सकते हैं, जो आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को सपोर्ट करते हैं और पाचन बेहतर करने में मददगार होते हैं।
गर्मी, डिहाइड्रेशन या डायरिया के बाद शरीर में नमक की कमी पूरी करने के लिए भी इसे उपयोगी माना जाता है। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट इस बात पर जोर देते हैं कि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही किया जाए।
घर पर कैसे तैयार करें पिकल जूस
खीरा, गाजर, नींबू या कच्चा आम जैसे पदार्थों को साफ कर टुकड़ों में काट लें। कांच के जार में डालकर उबला-ठंडा पानी भरें। स्वादानुसार सेंधा नमक, हल्दी, सरसों के दाने और नींबू का रस या सिरका मिलाएं। जार को 4–5 दिनों तक धूप में रखें। फर्मेंट होने के बाद यही पानी नेचुरल पिकल जूस बन जाता है।
मात्रा का रखें ध्यान
डाइटिशियन के मुताबिक, पिकल जूस में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, इसलिए दिन में 30–50 मिलीलीटर से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। अधिक सेवन से हाई ब्लड प्रेशर, एसिडिटी या किडनी संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या नियमित सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
