Indian Budget History : नई दिल्ली। देश का आम बजट 2026 अब कुछ ही दिनों में पेश होने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना लगातार 9वां यूनियन बजट संसद में रखेंगी। लेकिन हर साल सुर्खियों में रहने वाला यह बजट सिर्फ एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक इतिहास का आईना भी है। इसकी जड़ें ब्रिटिश शासन के दौर से जुड़ी हैं और आज यह डिजिटल युग की जरूरतों के अनुरूप आकार ले चुका है।
ब्रिटिश काल में हुई बजट परंपरा की शुरुआत
भारत में बजट पेश करने की परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। 7 अप्रैल 1860 को भारत का पहला बजट प्रस्तुत किया गया, जिसे तत्कालीन ब्रिटिश वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था। यह वही दौर था जब पहली बार सरकार ने जनता के सामने आय और व्यय का आधिकारिक लेखा-जोखा रखा। यहीं से भारत में वार्षिक बजट की परंपरा ने जन्म लिया।
आजादी के बाद पहला बजट और अनोखी व्यवस्था
15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिलने के बाद देश का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश हुआ। देश के पहले वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी ने यह बजट पेश किया था। यह पूर्ण वर्ष का बजट नहीं था, बल्कि साढ़े सात महीने की अवधि के लिए बनाया गया था, क्योंकि नया वित्त वर्ष अप्रैल 1948 से शुरू होना था।
इस बजट से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि उस समय भारत और पाकिस्तान ने सितंबर 1948 तक एक ही मुद्रा का इस्तेमाल करने का फैसला किया था, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं की आपसी निर्भरता साफ झलकती है।
कठिन हालात में बना पहला स्वतंत्र बजट
विभाजन, दंगों और आर्थिक अस्थिरता के बीच पेश किए गए इस पहले बजट में कुल अनुमानित आय 171.15 करोड़ रुपये रखी गई थी, जबकि राजकोषीय घाटा 204.59 करोड़ रुपये था। बाद में आर.के. शनमुखम चेट्टी के इस्तीफे के बाद जॉन मथाई ने वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला। उन्होंने 1949-50 का वह ऐतिहासिक बजट पेश किया, जो सभी रियासतों को मिलाकर संयुक्त भारत के लिए तैयार किया गया पहला बजट था।
जब प्रधानमंत्री ने संसद में रखा बजट
भारतीय बजट इतिहास का एक अनोखा अध्याय साल 1958 में देखने को मिला, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खुद संसद में बजट पेश किया। दरअसल, वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णमाचारी को मुंद्रा घोटाले के बाद इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके चलते प्रधानमंत्री नेहरू को यह जिम्मेदारी निभानी पड़ी।
इंदिरा गांधी ने रचा नया इतिहास
साल 1970 में बजट इतिहास में एक और ऐतिहासिक पल जुड़ा। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 28 फरवरी 1970 को बजट पेश कर देश की पहली महिला वित्त मंत्री बनने का गौरव हासिल किया। यह कदम उस समय उठाया गया, जब उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के साथ मतभेदों के चलते वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी इंदिरा गांधी ने स्वयं संभाली थी।
बजट 2026 और निर्मला सीतारमण का रिकॉर्ड
अब वर्तमान की बात करें तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट 2026 पेश करेंगी। यह उनका 9वां यूनियन बजट होगा, जो उन्हें भारत के सबसे लंबे समय तक बजट पेश करने वाले वित्त मंत्रियों की सूची में शामिल करता है। वैश्विक आर्थिक दबाव, व्यापारिक अनिश्चितताओं और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच यह बजट भारत की आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
