Nihilist Penguin : नई दिल्ली। 2026 की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक अनोखे और चुपचाप प्रभाव डालने वाले ट्रेंड के साथ हुई है। इस वायरल वीडियो का मुख्य आकर्षण है एक अकेला पेंगुइन, जिसे लोग अब ‘निहिलिस्ट पेंगुइन’ के नाम से जानते हैं। टिकटॉक, इंस्टाग्राम, रेडिट और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यह वीडियो तेजी से फैल रहा है, और लोग इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर यह पेंगुइन क्यों अलग चल रहा है।
19 साल पुरानी डॉक्यूमेंट्री से वायरल फुटेज
यह क्लिप नया नहीं है। यह जर्मन फिल्ममेकर वर्नर हर्जोग की 2007 में आई डॉक्यूमेंट्री ‘Encounters at the End of the World’ का हिस्सा है। फिल्म अंटार्कटिका की यात्रा पर आधारित है, जिसमें कैमरा एक ऐसे पेंगुइन को दिखाता है जो अपनी कॉलोनी छोड़कर समुद्र की बजाय बर्फीले पहाड़ों की ओर अकेला बढ़ता है। हर्जोग ने इसे अपने नरेशन में लगभग “मौत की ओर बढ़ता मार्च” कहा है।
इंटरनेट पर अचानक छाया वायरल
सामान्यत: पेंगुइन हमेशा अपने झुंड और समुद्र के पास रहते हैं। इस वीडियो में अकेले, उल्टी दिशा में चलते पेंगुइन को देख लोग हैरान हैं। जनवरी 2026 में सोशल मीडिया पर फुटेज के छोटे-छोटे एडिट्स वायरल होने लगे और यह धीरे-धीरे ‘निहिलिस्ट पेंगुइन’ मीम बन गया।
लोगों ने निकाला मतलब
इस मीम को लोग आज की इंसानी जिंदगी से जोड़ रहे हैं। इसे बर्नआउट, इमोशनल थकान, रोज़मर्रा की भाग-दौड़ और “खो जाने” की भावना का प्रतीक माना जा रहा है। पेंगुइन की धीमी और शांत चाल कई लोगों को अपनी ही जिंदगी की याद दिला रही है।
नाम ‘निहिलिस्ट पेंगुइन’ क्यों पड़ा?
इस नाम की वजह पेंगुइन का जानबूझकर ठहरा हुआ और दार्शनिक रवैया है, जैसे उसने जीवन के सभी मायने छोड़ दिए हों।
विज्ञान क्या कहता है?
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पेंगुइन के इस व्यवहार के पीछे कोई दार्शनिक सोच नहीं है। बीमारी, न्यूरोलॉजिकल दिक्कत या कन्फ्यूजन की वजह से कुछ पेंगुइन रास्ता भटक सकते हैं। असल में इंसान ही अपने अनुभवों और दृष्टिकोण के आधार पर इस वीडियो को अर्थ देते हैं।
डॉक्यूमेंट्री देखें
जो लोग पूरी डॉक्यूमेंट्री देखना चाहते हैं, वे ‘Encounters at the End of the World’ यूट्यूब पर फ्री में देख सकते हैं और पेंगुइन की यात्रा की पूरी कहानी समझ सकते हैं।
