Yogi-Modi Meeting: नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रधानमंत्री आवास पर करीब एक घंटे तक अहम बैठक की। इस मुलाकात को सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक फैसलों की दिशा तय करने वाली बैठक के तौर पर देखा जा रहा है। चर्चा का केंद्र रहा उत्तर प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रदेश सरकार के कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ मंत्रिमंडल में फेरबदल और नए चेहरों को शामिल करने पर विचार किया गया। कुछ विभागों के प्रदर्शन, संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय तथा क्षेत्रीय संतुलन जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि सरकार को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिम्मेदारियों में बदलाव की रूपरेखा पर मंथन किया गया।
2027 विधानसभा चुनाव पर फोकस
पीएम मोदी और सीएम योगी की बातचीत में 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भी प्रमुख एजेंडे में रहे। संगठन की मजबूती, जमीनी फीडबैक, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन, जनहित के मुद्दों और सरकार की उपलब्धियों को लेकर रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया। पार्टी को चुनावी मोड में लाने के लिए किन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना है, इस पर भी संकेत मिले हैं।

क्यों खास है योगी का दिल्ली दौरा?
सीएम योगी का यह दिल्ली दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी दौरान उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी राजधानी में मौजूद हैं। ब्रजेश पाठक ने हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की थी, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलावों को लेकर शीर्ष स्तर पर गंभीर मंथन चल रहा है।
कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज
फिलहाल उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में कई पद रिक्त हैं। ऐसे में नए मंत्रियों को शामिल करने, कुछ चेहरों को प्रमोट करने और कुछ विभागों में बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में भाजपा हाईकमान के साथ विचार-विमर्श के बाद इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
आने वाले दिनों में बढ़ेगी सियासी गर्मी
सीएम योगी की पीएम मोदी के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य वरिष्ठ नेताओं से प्रस्तावित मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जल्द ही बड़े फैसले सामने आ सकते हैं। जैसे-जैसे 2027 नजदीक आएगा, वैसे-वैसे राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।
